पवित्र बाइबल

दान के गोत्र की मूर्तिपूजा और विजय की कहानी

न्यायियों 18 का यह कहानी दान के गोत्र के लोगों की यात्रा और उनके द्वारा मूर्तिपूजा को अपनाने की घटना को विस्तार से बताता है। यह कहानी इस्राएल के उस समय की है जब “हर एक व्यक्ति अपनी ही दृष्टि में ठीक काम करता था” (न्यायियों 17:6)। यह एक ऐसा समय था जब लोग परमेश्वर के नियमों को भूल चुके थे और अपनी इच्छानुसार जीवन जी रहे थे।

### दान के गोत्र की खोज
दान के गोत्र के लोगों को अपने लिए बसने के लिए भूमि की तलाश थी। उन्हें यहोशू द्वारा दी गई भूमि अभी तक पूरी तरह से प्राप्त नहीं हुई थी, क्योंकि वहाँ के निवासी मजबूत और युद्धकुशल थे। इसलिए, दान के गोत्र ने अपने पाँच बहादुर और समझदार पुरुषों को भेजा, ताकि वे देश का पता लगा सकें और एक ऐसी जगह ढूंढ सकें जहाँ वे बस सकें। ये पुरुष अपनी यात्रा पर निकले और उत्तर की ओर चल पड़े।

### मीकाह के घर की यात्रा
रास्ते में, वे एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश में पहुँचे, जहाँ मीकाह नाम का एक व्यक्ति रहता था। मीकाह के पास एक मूर्ति और एक एपोद (पूजा का वस्त्र) था, और उसने एक लेवीय याजक को अपने घर में रखा हुआ था, जो उसके लिए पूजा करता था। दान के गोत्र के पुरुषों ने मीकाह के घर में प्रवेश किया और उस लेवीय याजक से बात की। उन्होंने उससे पूछा, “तुम यहाँ क्या कर रहे हो? यह स्थान किसका है?”

लेवीय याजक ने उन्हें बताया कि मीकाह ने उसे नियुक्त किया है ताकि वह उसके लिए पूजा कर सके और उसकी मूर्तियों की सेवा कर सके। यह सुनकर दान के गोत्र के पुरुषों ने सोचा कि यह लेवीय याजक उनके लिए भी भविष्यवाणी कर सकता है और उनकी यात्रा में मदद कर सकता है। उन्होंने याजक से पूछा, “हमारी यात्रा सफल होगी क्या?” याजक ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी यात्रा सफल होगी और परमेश्वर उनके साथ है।

### लाइश की खोज
दान के गोत्र के पुरुषों ने अपनी यात्रा जारी रखी और उत्तर की ओर बढ़ते गए। वे लाइश नामक एक शहर में पहुँचे, जो सिदोनियों के देश में स्थित था। यह शहर शांत और सुरक्षित था, क्योंकि वहाँ के निवासी व्यापार और संस्कृति में लगे हुए थे और युद्ध के लिए तैयार नहीं थे। दान के गोत्र के पुरुषों ने देखा कि यह जगह उनके लिए बसने के लिए उपयुक्त है। वे वापस लौटे और अपने गोत्र के लोगों को यह खबर सुनाई।

### दान के गोत्र का आक्रमण
दान के गोत्र के लोगों ने यह निर्णय लिया कि वे लाइश पर आक्रमण करेंगे और उसे अपने कब्जे में ले लेंगे। उन्होंने छः सौ सशस्त्र पुरुषों को इकट्ठा किया और लाइश की ओर कूच किया। रास्ते में, वे फिर से मीकाह के घर से गुजरे। उन्होंने मीकाह की मूर्ति, एपोद और अन्य पूजा के सामान को चुरा लिया। जब मीकाह ने यह देखा, तो वह अपने पड़ोसियों के साथ दान के गोत्र के पीछे भागा और उनसे अपनी मूर्तियों को वापस करने के लिए कहा।

लेकिन दान के गोत्र के लोगों ने मीकाह को धमकी दी और कहा, “तुम चुप रहो, नहीं तो हम तुम्हें मार डालेंगे।” मीकाह डर गया और वापस लौट गया। दान के गोत्र ने मीकाह की मूर्तियों और याजक को अपने साथ ले लिया और लाइश की ओर बढ़ गए।

### लाइश पर विजय
दान के गोत्र ने लाइश पर हमला किया और उसे जीत लिया। उन्होंने शहर के निवासियों को मार डाला और शहर को जला दिया। फिर उन्होंने उस स्थान का नाम बदलकर “दान” रख दिया, क्योंकि वह दान के गोत्र की विरासत बन गया। उन्होंने मीकाह की मूर्ति को वहाँ स्थापित किया और उस लेवीय याजक को अपना याजक बना लिया। इस तरह, दान के गोत्र ने मूर्तिपूजा को अपना लिया और परमेश्वर के नियमों को तोड़ दिया।

### थियोलॉजिकल संदेश
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जब लोग परमेश्वर के नियमों को भूल जाते हैं और अपनी इच्छानुसार जीवन जीने लगते हैं, तो वे पाप में गिर जाते हैं। दान के गोत्र ने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया और मूर्तिपूजा को अपना लिया, जो इस्राएल के लिए एक बड़ा पाप था। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हमें हमेशा परमेश्वर के वचन का पालन करना चाहिए और उसकी इच्छा के अनुसार जीवन जीना चाहिए।

LEAVE A RESPONSE

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *