पवित्र बाइबल

बिन्यामीन वंश की गाथा

यह कहानी उस समय की है जब बिन्यामीन के वंशज अपने पूर्वजों की भूमि में बस रहे थे। पवित्र शास्त्र के अनुसार, इतिहास की पुस्तकों में दर्ज है कि बिन्यामीन के पुत्र बेला, अशबेल, अहराह, नोहा और रापा थे। इनमें से बेला के वंश में महान योद्धा और नेता पैदा हुए।

एक दिन, गबा नगर के पास हरे-भरे मैदानों में बिन्यामीन के वंश के लोग इकट्ठा हुए। उनके सरदार एहुद एक बुद्धिमान और परमेश्वर से डरने वाले व्यक्ति थे। वे लोगों को समझाते हुए कह रहे थे, “हे भाइयो, परमेश्वर ने हमें यह भूमि दी है। हमें उसकी आज्ञाओं का पालन करना चाहिए और उसके मार्गों पर चलना चाहिए।”

उन दिनों में शहरयिम नामक स्थान पर एक विशेष घटना घटी। वहाँ के निवासियों ने मोआब देश की स्त्रियों से विवाह किया था, जिसके फलस्वरूप हुशीम और बारा नामक पुत्र उत्पन्न हुए। समय बीतता गया और ये परिवार आय्यालोन नगर में जाकर बस गए, जहाँ उन्होंने गत के निवासियों को वहाँ से निकाल दिया।

इनमें से एक वीर योद्धा शमार्याह था, जिसने अपने पुत्रों को परमेश्वर की शिक्षा दी। उसके पुत्रों ने अपने पिता की तरह ही बहादुरी और धार्मिकता का मार्ग अपनाया। वे सभी अपने-अपने समय में समाज के स्तंभ बने और लोगों का मार्गदर्शन किया।

कुछ पीढ़ियों बाद, गिबोन नगर में येइल नामक एक व्यक्ति रहता था। उसकी पत्नी का नाम माका था। उनके पुत्र अब्दोन, सूर, किश, बाल, नादाब, गदोर, अहियो, जकर्याह और मिकलोत थे। मिकलोत ने शिमीम को जन्म दिया। ये सभी अपने पिता के घर में रहते हुए परमेश्वर की सेवा करते थे।

समय के साथ ये परिवार यरूशलेम के निकट बस गए। वहाँ उन्होंने एक सुंदर मंदिर बनवाया जहाँ वे नियमित रूप से परमेश्वर की उपासना करते थे। उनके नेता नेर और किश थे, जिन्होंने लोगों को एकत्रित करके परमेश्वर के वचनों का प्रचार किया।

इनमें सबसे प्रसिद्ध शाऊल हुआ, जो किश का पुत्र था। शाऊल के पुत्र योनातान, मल्कीशुआ, अबीनादाब और एशबाल थे। योनातान के पुत्र मरीबबाल थे, और मरीबबाल के मीका नामक पुत्र हुआ। इस प्रकार बिन्यामीन का वंश बढ़ता गया और फलता-फूलता रहा।

ये सभी लोग अपने-अपने नगरों में रहते हुए परमेश्वर की आराधना करते थे। वे सुबह-शाम प्रार्थना करते, अपने बच्चों को परमेश्वर की व्यवस्था सिखाते और अपने पड़ोसियों के साथ प्रेमपूर्वक रहते थे। उनकी सभाओं में भजन गाए जाते थे और परमेश्वर के चमत्कारों की कहानियाँ सुनाई जाती थीं।

इस प्रकार बिन्यामीन का वंश परमेश्वर की कृपा से फलता-फूलता रहा और उन्होंने इज़राइल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। वे न केवल वीर योद्धा थे, बल्कि परमेश्वर के सच्चे भक्त भी थे, जिन्होंने अपनी पीढ़ियों को धार्मिकता का मार्ग दिखाया।

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