पवित्र बाइबल

दाऊद का विश्राम दिवस भजन

एक समय की बात है, जब राजा दाऊद परमेश्वर के सामने बैठा हुआ था और उसके मन में एक नया गीत उमड़ रहा था। वह सप्ताह के सातवें दिन, विश्राम के दिन परमेश्वर की महिमा गाने के लिए विशेष रूप से प्रेरित हुआ। उसने एक सुंदर सारंगी उठाई और अपने होठों से ये शब्द निकले:

“हे परमेश्वर, यह कितना भला है कि हम तेरी स्तुति करें, और तेरे नाम का गुणगान करें, हे परमपिता! प्रातःकाल तेरी करुणा का वर्णन करना, और रात-रात को तेरी सच्चाई का बखान करना कितना मधुर है!”

दाऊद की आँखें आनंद से चमक उठीं जब उसने देखा कि कैसे परमेश्वर ने दस तारोंवाले बाजे और सारंगी बजाने की कला उसे दी थी। वह गाता रहा, “क्योंकि हे परमेश्वर, तू ने अपने कामों से मुझे आनन्दित किया है; मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा।”

तभी दाऊद ने अपने चारों ओर देखा। उसने सोचा कि मनुष्य कितने मूर्ख हैं जो परमेश्वर के मार्गों को नहीं समझते। वह गाने लगा, “तेरे काम हे परमेश्वर, कितने महान हैं! तेरे विचार अत्यन्त गहिरे हैं! मूर्ख मनुष्य यह नहीं जानता, और अज्ञानी यह नहीं समझता।”

राजा ने अपनी आँखें उठाकर देखा कि कैसे दुष्ट घास के समान उगते हैं, और सब अधर्मी फूलते दिखाई देते हैं, परन्तु वे सदैव के लिए नाश होने के लिए हैं। दाऊद ने गाया, “हे परमेश्वर, सदैव तू उच्चतम रहेगा!”

फिर दाऊद ने धर्मियों के बारे में गाया। उसने देखा कि कैसे खजूर के वृक्ष के समान धर्मी फलते-फूलते हैं, और लबनान के देवदार के समान बढ़ते हैं। वे परमेश्वर के घर में लगाए गए हैं, वे हमारे परमेश्वर के आंगनों में फलते हैं। वे बुढ़ापे में भी फलते रहेंगे, रसीले और हरे-भरे बने रहेंगे।

दाऊद की आवाज़ और भी मधुर हो गई जब उसने गाया, “इसलिये वे प्रगट करेंगे कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उसमें कुछ भी अन्याय नहीं।”

उसने अपने जीवन के अनुभवों को याद किया – कैसे परमेश्वर ने उसे शेर और भालू के पंजों से बचाया, कैसे गोलियत पर विजय दिलाई, और कैसे शाऊल के हाथों से उसकी रक्षा की। हर परीक्षा में परमेश्वर उसकी शक्ति और शरणस्थान बना रहा।

जैसे-जैसे सूरज डूबने लगा, दाऊद का गीत और भी गहरा होता गया। उसने महसूस किया कि परमेश्वर की न्यायपूर्ण व्यवस्था सदैव बनी रहती है। दुष्ट अंततः नष्ट हो जाते हैं, परन्तु जो परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, वे हरे-भरे वृक्षों के समान फलते-फूलते रहते हैं।

अंत में, दाऊद ने सारंगी को एक मधुर स्वर में बजाया और गाया, “धर्मी फूलते रहेंगे, वे बुढ़ापे में भी फलदार होंगे, और हरे-भरे बने रहेंगे।” उसने अपनी आँखें आकाश की ओर उठाई और कहा, “हे यहोवा, तू सचमुच उच्चतम है, और सदैव उच्चतम रहेगा!”

यह गीत इतना प्रभावशाली था कि यह इज़राइल के इतिहास में सदैव के लिए अंकित हो गया, और आज भी लोग विश्राम के दिन इस भजन को गाकर परमेश्वर की महिमा करते हैं।

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