पवित्र बाइबल

दो साक्षियों की शक्ति

यह प्रकाशितवाक्य की ग्यारहवीं अध्याय की कहानी है, जो हमें दो साक्षियों के विषय में बताती है। परमेश्वर ने मुझे यूहन्ना को दर्शन दिया, और उसने एक सुनहरी नापने की छड़ी देखी। एक स्वर्गदूत खड़ा हुआ और कहा, “उठ, और परमेश्वर के मन्दिर को नाप ले, और वेदी को, और उन्हें भी जो उसमें पूजा करते हैं। परन्तु बाहरी आंगन को छोड़ दे, क्योंकि वह अन्यजातियों को दिया गया है, और वे पवित्र नगर को बयालीस महीने तक रौंदेंगे।”

तब परमेश्वर ने अपने दो साक्षियों को खड़ा किया, जो पृथ्वी के सर्वशक्तिमान प्रभु के सामने खड़े रहेंगे। उन्हें टाट के वस्त्र पहनाए गए, जो शोक और दुःख का प्रतीक थे। ये दोनों जैतून के वृक्ष और दीपकदान के समान थे, जो सारी पृथ्वी के प्रभु के सामने खड़े हैं। यदि कोई उन्हें हानि पहुँचाना चाहे, तो उनके मुँह से आग निकलकर उनके शत्रुओं को भस्म कर देगी। जो कोई उन्हें चोट पहुँचाना चाहेगा, उसे इसी प्रकार मार डाला जाएगा।

इन साक्षियों के पास आकाश को बन्द करने का अधिकार था, ताकि उनके भविष्यवक्तृत्व के दिनों में वर्षा न हो। उनके पास जल को लहू में बदलने का भी अधिकार था, और किसी भी प्रकार की विपत्ति से पृथ्वी को मारने का अधिकार था, जब कभी वे चाहें। जब वे अपनी गवाही पूरी कर चुके, तो अथाह कुण्ड से चढ़ता हुआ जानवर उनसे लड़ेगा, और उन पर विजय पाकर उन्हें मार डालेगा।

उनकी लोथें उस महानगर की सड़क पर पड़ी रहेंगी, जिसे आत्मिक रूप से सदोम और मिस्र कहा जाता है, जहाँ हमारे प्रभु को क्रूस पर चढ़ाया गया था। विभिन्न लोगों, कुलों, भाषाओं और जातियों के लोग उनके शवों को साढ़े तीन दिन तक देखेंगे, और उन्हें कब्र में रखने की अनुमति नहीं देंगे। पृथ्वी के निवासी उनके कारण आनन्द मनाएँगे और उपहार भेजेंगे, क्योंकि इन दोनों भविष्यवक्ताओं ने पृथ्वी के निवासियों को पीड़ा दी थी।

परन्तु साढ़े तीन दिन के बाद, परमेश्वर की ओर से जीवन की साँस उनमें प्रवेश कर गई, और वे अपने पैरों पर खड़े हो गए। जो लोग उन्हें देख रहे थे, वे बहुत भयभीत हो गए। तब उन्होंने स्वर्ग से एक बड़ा शब्द सुना, जो उनसे कह रहा था, “यहाँ ऊपर आ जाओ।” और वे बादल पर चढ़कर स्वर्ग में चले गए, और उनके शत्रुओं ने उन्हें देख लिया।

उसी घड़ी एक बड़ा भूकम्प आया, और नगर का दसवाँ भाग गिर गया, और भूकम्प में सात हज़ार लोग मारे गए। शेष लोग डर गए और स्वर्ग के परमेश्वर की महिमा की। इस प्रकार दूसरी विपत्ति बीत गई, और देखो, तीसरी विपत्ति शीघ्र ही आनेवाली है।

यह दर्शन हमें सिखाता है कि परमेश्वर की सामर्थ्य सर्वोच्च है, और वह अपने विश्वासयोग्य सेवकों की रक्षा करता है। भले ही संसार में कितनी भी बुराई क्यों न फैले, परमेश्वर का न्याय अवश्य आएगा, और उसके लोग अन्ततः विजयी होंगे। यह आशा की कहानी है, जो हमें विश्वास में दृढ़ रहने की प्रेरणा देती है।

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