पवित्र बाइबल

शुद्ध और अशुद्ध का मार्ग

वह सुबह धीरे-धीरे आई, जैसे कोई बूढ़ा याजक मंदिर के पर्दे हटा रहा हो। रेगिस्तान की रेत पर सूरज की पहली किरणें ऐसे पड़ रही थीं मानो स्वर्णिम अक्षर लिखे जा रहे हों। मूसा ने अपनी लाठी ज़मीन पर टिकाई और उस भीड़ की ओर देखा जो उसके चारों ओर इकट्ठा हो चुकी थी। लोगों की आँखों में वही जिज्ञासा थी जो बच्चों में नए पाठ सीखते समय दिखती है।

“सुनो, हे इस्राएल के लोगो,” उसकी आवाज़ रेगिस्तान की हवा की तरह स्पष्ट और ठोस थी, “परमेश्वर ने हमें जीवन और मृत्यु के बीच चुनाव करना सिखाया है। आज वह हमें शुद्ध और अशुद्ध के बीच का मार्ग दिखाएगा।”

भीड़ में सन्नाटा छा गया। दूर कहीं एक बकरी की घंटी बजी और हवा में खो गई।

“जो पशु अपने खुर फाड़ता है और जुगाली करता है, वह तुम्हारे भोजन के योग्य है,” मूसा ने कहा। उसकी उँगलियाँ हवा में उन आकृतियों को बना रही थीं जो उसके शब्दों को जीवंत कर रही थीं। “बैल, भेड़, बकरी – ये सब तुम खा सकते हो। पर सूअर, जो खुर तो फाड़ता है पर जुगाली नहीं करता, वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है।”

एक युवक ने पूछा, “पर क्यों? सूअर का मांस तो स्वादिष्ट होता है।”

मूसा ने उसे वैसे ही देखा जैसे कोई पिता अपने जिज्ञासु बेटे को देखता है। “क्योंकि परमेश्वर ने हर प्राणी को उसके स्वभाव के अनुसार बनाया है। जुगाली करने वाला पशु शांत होता है, धैर्यवान होता है। वह अपने भोजन को दो बार चबाता है, जैसे तुम परमेश्वर की व्यवस्था को दो बार सोचोगे। सूअर का स्वभाव अलग है। वह सब कुछ खा जाता है, बिना विचारे।”

दोपहर तक, सूरज रेत को तपा रहा था। लोग छाया की तलाश में इधर-उधर खिसकने लगे थे। मूसा ने अपनी बात जारी रखी।

“अब पानी के जीवों की बात करें,” उसने कहा, “जिसमें पंख और शल्क हों, वही तुम्हारे भोजन के योग्य है। मछलियाँ जिनके शल्क चाँद की रोशनी की तरह चमकते हैं – वे शुद्ध हैं। पर जिनके शल्क नहीं हैं, जो कीचड़ में रहती हैं, वे अशुद्ध हैं।”

एक मछुआरे ने सिर खुजलाया, “मेरे जाल में कल एक ऐसी मछली आई थी जिसके शल्क नहीं थे। मैंने उसे वापस पानी में डाल दिया।”

मूसा ने मुस्कुराया, “तुमने ठीक किया। परमेश्वर ने हर प्राणी को उसका स्थान दिया है। जो मछली शल्क के बिना है, वह कीचड़ को साफ करती है। उसका अपना काम है। तुम्हारा काम उसे खाना नहीं है।”

शाम होने लगी थी जब मूसा ने पक्षियों के बारे में बताना शुरू किया। आकाश में बाज़ के झुंड उड़ते दिख रहे थे।

“जो पक्षी मांस खाते हैं, जो अपने पंजों से शिकार करते हैं, वे तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं,” मूसा ने आकाश की ओर इशारा किया। “पर जो बीज चुगते हैं, जो अपनी चोंच से अनाज उठाते हैं, वे शुद्ध हैं। कबूतर, तीतर, बटेर – इन्हें तुम खा सकते हो।”

एक बूढ़ी औरत ने पूछा, “और चींटी? टिड्डा? छिपकली?”

मूसा ने अपनी दाढ़ी सहलाई, “चींटी तो परिश्रम की मिसाल है। उसे मत मारो। टिड्डे जो उछलते हैं, वे शुद्ध हैं। पर जो ज़मीन पर रेंगते हैं, वे अशुद्ध हैं।”

अंत में, सूरज क्षितिज पर लाल हो चुका था। मूसा ने अपनी आँखें बंद कीं और बोले, “यह कोई साधारण नियम नहीं है। यह परमेश्वर का तुमसे वार्तालाप है। जब तुम खाने से पहले सोचोगे कि क्या खाना है, तब तुम परमेश्वर को याद करोगे। जब तुम शुद्ध और अशुद्ध में भेद करोगे, तब तुम अच्छे और बुरे में भेद करना सीखोगे।”

लोग चले गए। रेत पर उनके पैरों के निशान बन गए, जैसे कोई नई भाषा लिखी गई हो। आकाश में तारे निकल आए थे। मूसा अकेला खड़ा सोच रहा था कि परमेश्वर की व्यवस्था कोई बोझ नहीं है, बल्कि एक रास्ता है – ऐसा रास्ता जो मनुष्य को उसकी गरिमा का एहसास कराता है।

दूर से एक सियार की आवाज़ आई। मूसा ने अपना चोगा ठीक किया और मिलाप वाले तम्बू की ओर चल पड़ा। रात की हवा में उसे लगा जैसे परमेश्वर की साँसें चल रही हों, जो हर नियम में जीवन का संगीत भर रही थीं।

LEAVE A RESPONSE

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *