सुलैमान के राज्याभिषेक के बाद का समय था। दाऊद बूढ़ा हो चला था, उसकी आँखों में अब वह चमक नहीं रही थी जो एक समय गोलियत का सामना करते समय दिखाई देती थी। महल के भीतर की हवा में मृत्यु की गंध घुल चुकी थी। दाऊद ने सुलैमान को अपने पास बुलाया। उसके हाथ काँप रहे थे, पर आवाज़ में अब भी वही दृढ़ता थी।
“सुन, मेरे बेटे,” दाऊद ने कहा, “मैं संसार के सब मनुष्यों के मार्ग पर चलने वाला हूँ। तू बलवान बन, और यहोवा की व्यवस्था का पालन करना।”
कमरे में जैतून के तेल के दीपक की लौ टिमटिमा रही थी। सुलैमान ने अपने पिता की बातें गंभीरता से सुनीं। दाऊद ने उसे योआब के बारे में चेतावनी दी – वह सेनापति जिसने अब्नेर और अमासा का खून किया था। “उसके सिर के बाल कभी अधेड़ न हों,” दाऊद ने कहते हुए आँखें मूंद लीं, मानो उन मौतों की याद उसे फिर से तड़पा रही हो।
फिर बारी आई शिमी की – वह बेंयामीनी जिसने दाऊद को भागते समय शाप दिया था। “उसे अधोल ऊपर न उतरने देना,” दाऊद ने कहा, उसकी आवाज़ में एक कठोरता आ गई थी।
जब दाऊद ने अपनी आँखें हमेशा के लिए बंद कीं, सुलैमान सिंहासन पर बैठा। उसके हाथ में अब पूरे इस्राएल की ज़िम्मेदारी थी। कुछ ही दिनों बाद, अदोनिय्याह – जो पहले ही सिंहासन के लिए दावा कर चुका था – ने बतशेबा के through एक निवेदन भेजा। वह अबीशग से विवाह करना चाहता था, जो दाऊद की अंतिम सहचरी रही थी।
सुलैमान की आँखों में चिंगारी-सी दौड़ गई। “तू अदोनिय्याह के लिए ही क्यों निवेदन कर रही है?” उसने अपनी माँ से पूछा, “क्या तू नहीं जानती कि यह राज्य के लिए दूसरा दावा है?”
महल की खिड़की से सूरज की किरणें आ रही थीं, पर उनमें कोई गर्मी नहीं थी। सुलैमान ने बनायाह को बुलाया। “जाओ, अदोनिय्याह को मार डालो,” उसकी आवाज़ में कोई कंपन नहीं था।
फिर योआब की बारी आई। जब उसे पता चला कि सुलैमान उसे दण्ड देना चाहता है, वह यहोवा के डेरे में भाग गया और वेदी के सींगों को पकड़ लिया। पर सुलैमान के आदेश ने कोई रियायत नहीं दिखाई। “जाओ, उसे वहीं मार डालो,” सुलैमान ने कहा। बनायाह ने आज्ञा का पालन किया, और योआब का खून वेदी के पास ही बह गया।
अब शिमी बचा था। सुलैमान ने उसे यरूशलेम में रहने का आदेश दिया, चेतावनी दी कि अगर वह किद्रोन नदी पार करेगा तो मार डाला जाएगा। तीन साल बाद, शिमी के दो दास भाग गए। वह उन्हें ढूँढ़ने गश में चला गया। जब सुलैमान को पता चला, उसने फिर बनायाह को बुलाया।
“क्या तूने वह शपथ नहीं याद रखी जो तूने यहोवा के नाम पर खाई थी?” सुलैमान ने पूछा, जब शिमी को उसके सामने लाया गया।
शिमी की आँखों में डर था। “मैंने पाप किया है, हे प्रभु,” उसने कहा।
पर सुलैमान ने कोई दया नहीं दिखाई। “तूने अपनी मौत स्वयं चुनी है,” उसने कहा, और बनायाह ने शिमी को मार डाला।
इन सबके बाद, सुलैमान का राज्य स्थिर हो गया। लोगों ने देखा कि उसके न्याय में दाऊद की दृढ़ता थी, पर साथ ही एक नई बुद्धि भी थी। राजमहल की छत पर खड़ा सुलैमान यरूशलेम को देख रहा था। हवा में अब शांति थी, पर उसके मन में एक बात घूम रही थी – राज्य चलाना केवल शक्ति का खेल नहीं, बल्कि यहोवा के मार्ग पर चलने की कसौटी है। उसने आँखें बंद कीं, और एक प्रार्थना फुसफुसाई – “हे यहोवा, मुझे समझदारी देना, ताकि मैं तेरे लोगों का ठीक से न्याय कर सकूँ।”
सूरज अस्त हो रहा था, और यरूशलेम की सड़कों पर शाम की छाया लंबी होती जा रही थी।




