पवित्र बाइबल

सत्ता की प्यास और प्रतिशोध

शेखेम के फाटकों पर दोपहर की धूप तेज थी। पत्थरों से झिलमिलाती गर्मी हवा में तैर रही थी। नगर के बुजुर्ग, जिनके चेहरों पर सालों के फैसलों की झुर्रियाँ थीं, चबूतरे पर इकट्ठा हुए। उनके सामने खड़ा था अबीमलेक, गिदोन का पुत्र। उसकी आँखों में एक अजीब चमक थी, वह चमक जो सत्ता की प्यास से पैदा होती है।

“सुनो,” उसकी आवाज़ में मधुरता का झूठा स्वर था, “मेरे सत्तर भाई, जो तुम सब पर राज करें, या मैं, जो तुम्हारा अपना हूँ? एक हड्डी और मांस। सोचो।”

शेखेम के लोगों के दिलों में एक कसक थी। गिदोन ने उन्हें मिद्यानियों से तो मुक्त किया था, पर उसके बाद के सालों में, उसके परिवार का रुतबा बोझ सा लगने लगा था। अबीमलेक की बात उनके असंतोष पर सेंध लगाती थी। उन्होंने मंदिर के खजाने से चांदी के सत्तर सिक्के उसे दिए। एक-एक सिक्का उसके एक-एक भाई के खून की कीमत।

अबीमलेक ने उस चांदी से आवारा और बदमाश लोगों को अपने साथ किया। ओफ्रा पहुँचा, अपने पिता के घर। वहाँ, एक ही पत्थर पर, उसने अपने सभी भाइयों को मार डाला। खून ने उस पत्थर का रंग बदल दिया। हवा में चीखों की गूँज रह गई। केवल सबसे छोटा, योताम, छिपकर बच गया। वह एक तरकश और दिल में जलते सवालों के साथ पहाड़ियों में लुप्त हो गया।

शेखेम में अबीमलेक का राज्याभिषेक हुआ। उसे राजा घोषित किया गया, वह भी उसी बाल-बरत के पास, जहाँ से उसके पिता ने कभी मिद्यानियों पर विजय पाई थी। लोग चिल्ला रहे थे, पर योताम, गिरज़ीम पर्वत की चोटी पर खड़ा, उनकी आवाज़ें सुन रहा था। उसने अपनी आवाज़ भरी, जो तेज हवा में कटकर नीचे उतर रही थी।

“शेखेम के लोगो, मेरी बात सुनो! एक बार पेड़ों ने अपने ऊपर एक राजा तैनात करने का फैसला किया। उन्होंने जैतून से कहा, ‘तू हम पर राज कर।’ जैतून ने जवाब दिया, ‘क्या मैं अपना तेल छोड़ दूँ, जिससे देवता और मनुष्य दोनों का सम्मान होता है, और पेड़ों के ऊपर मंडराने लगूँ?’ फिर उन्होंने अंजीर से कहा। अंजीर बोला, ‘क्या मैं अपनी मिठास और अपना अच्छा फल छोड़कर ऐसी बेकार चीज करूँ?’ फिर दाखलता से पूछा। उसने कहा, ‘क्या मैं अपनी नई दाखमधु छोड़ दूँ, जो परमेश्वर और मनुष्यों को आनंद देती है, और पेड़ों पर लहराने लगूँ?’ आखिरकार सभी पेड़ों ने काँटेदार झाड़ी से कहा, ‘तू ही हम पर राज कर।’ झाड़ी ने कहा, ‘यदि तुम सचमुच मुझे अपने ऊपर राजा बनाना चाहते हो, तो आओ, मेरी छाया में आश्रय लो। नहीं तो मेरे काँटों से आग निकलेगी और लेबानान के देवदारों को जला देगी।'”

योताम की आवाज़ रुकी। फिर वह बोला, “क्या तुमने सच्चाई और नेकनीयती से व्यवहार किया है? मेरे पिता गिदोन ने तुम्हारे लिए लड़ाई लड़ी, तुम्हें खतरे से बचाया। और आज तुमने उसी के घराने के खिलाफ विद्रोह किया है। तुमने अबीमलेक को राजा बनाया है, जो तुम्हारा भाई होने का दावा करता है। अगर तुमने सच्चाई से यह किया है, तो अबीमलेक और तुम सब आनंद मनाओ। और यदि नहीं, तो अबीमलेक से आग निकलेगी और शेखेम के लोगों को, और शेखेम से आग निकलेगी और अबीमलेक को भस्म कर देगी।”

इतना कहकर योताम भाग गया। उसके शब्द हवा में लटके रह गए, एक श्राप की तरह।

तीन साल बीते। अबीमलेक का शासन भारी पड़ने लगा। वह सिर्फ शेखेम का ही नहीं, आसपास के गाँवों का भी राजा बन बैठा था। उसका अहंकार बढ़ता गया। तभी परमेश्वर ने एक बुरी आत्मा भेजी, शेखेम के लोगों और अबीमलेक के बीच। विश्वासघात का बीज अंकुरित हो गया।

शेखेम के लोगों ने पहाड़ियों की तराई में घात लगाकर डाकू बैठा दिए, जो हर आने-जाने वाले को लूटते। अबीमलेक को इसकी भनक तक न लगी। फिर एक दिन, गाल नाम का एक आदमी शेखेम आया। उसने नगर के बुजुर्गों को भड़काया। “अबीमलेक कौन है,” वह चिल्लाया, “और शेखेम क्या है, कि हम उसकी सेवा करें? क्या वह गिदोन का पुत्र नहीं? क्या ज़बूल उसका सेनापति नहीं? शेखेम के लोगों, अपने पिता हमोर की संतानों की सेवा करो। क्यों हम किसी और के आगे झुकें?”

उसकी बातों ने आग में घी का काम किया। शेखेम विद्रोह पर उतारू हो गया। अबीमलेक को जब यह पता चला, तो उसने अपने सेनापति ज़बूल को, जो शेखेम का ही रहने वाला था, शहर में छोड़ दिया। ज़बूल ने गाल के घमंड को चुनौती दी। “तेरे बड़े-बड़े वचन कहाँ हैं?” उसने मजाक उड़ाया, “वही तो कहता था कि अबीमलेक कौन है कि हम उसकी सेवा करें। यही वह लोग हैं, जिनका तू तिरस्कार करता था। अब निकल और उनसे लड़।”

लड़ाई छिड़ गई। गाल और उसके साथी शेखेम से बाहर निकले, और अबीमलेक ने उन्हें हरा दिया। शहर के फाटक बंद कर दिए गए। अगले दिन, जब लोग खेतों में निकले, तो अबीमलेक ने अपनी सेना को तीन दलों में बाँटकर फिर हमला किया। भीषण संहार हुआ। अबीमलेक ने शहर पर कब्जा कर लिया, उसके निवासियों को मार डाला, और शहर को नमक से ढकवा दिया, ताकि वहाँ फिर कोई बस्ती न बस सके।

कुछ लोग शेखेम के दुर्ग के मंदिर में जा छिपे। अबीमलेक ने अपने लोगों से कहा, “जैसा मैंने किया है, वैसा ही तुम भी करो।” उन्होंने जंगल से लकड़ी काटकर लाई और उस दुर्ग के दरवाजे पर रखकर आग लगा दी। मंदिर में छिपे हुए सभी लोग, करीब एक हज़ार, स्त्री-पुरुष, सब जलकर राख हो गए।

अबीमलेक का अहंकार अब आसमान छू रहा था। वह थेबेस शहर की ओर बढ़ा। थेबेस के लोगों ने एक मजबूत गढ़ में शरण ली। अबीमलेक ने उस पर हमला किया। वह खुद आगे बढ़कर दरवाजा जलाने लगा। तभी एक स्त्री ने, जो गढ़ की दीवार पर खड़ी थी, चक्की का एक बड़ा पाट उठाया और नीचे फेंक दिया। वह पाट अबीमलेक के सिर पर जा गिरा। उसकी खोपड़ी टूट गई।

घायल, मरणासन्न, उसने अपने शस्त्रवाहक से कहा, “तलवार निकालो और मुझे मार डालो, ताकि लोग यह न कहें कि एक स्त्री ने अबीमलेक को मारा।” शस्त्रवाहक ने ऐसा ही किया। अबीमलेक वहीं मर गया।

जब इस्राएल के लोगों ने देखा कि अबीमलेक मर गया है, तो वे सब, एक-एक करके, अपने-अपने घरों को लौट गए। इस तरह परमेश्वर ने अबीमलेक के उस दुष्कर्म का बदला दिया, जो उसने अपने सत्तर भाइयों के साथ किया था। और शेखेम के लोगों की सारी दुष्टता भी उन्हीं के सिर पर लौट आई। योताम का श्राप सच हुआ। काँटेदार झाड़ी से निकली आग ने, उसी झाड़ी को भी जला दिया था।

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