यह वह समय था जब यहोराम इस्राएल के राजगद्दी पर बैठा। वह अहाब का पुत्र था, किंतु उसने बाल की मूर्तियों को हटा दिया था, हालाँकि वह नबाट के पुत्र यारोबाम के पापों से पूरी तरह दूर नहीं हुआ था। एक दिन, मोआब का राजा मेशा, जो अहाब के जीवनभर भेड़ों के लाखों बच्चों और लाखों मेम्नों की ऊन का कर देता था, उसने विद्रोह कर दिया। यह समाचार सुनते ही यहोराम ने सामरिया से चलकर सारे इस्राएल को इकट्ठा किया।
उसने यहूदा के राजा यहोशापात के पास यह संदेश भेजा, “मोआब के राजा ने मेरे विरुद्ध विद्रोह किया है। क्या तुम मेरे साथ चलोगे, मोआब के विरुद्ध युद्ध करने?” यहोशापात ने उत्तर दिया, “हाँ, मैं चलूँगा। मेरी सेना तुम्हारी सेना के समान है, मेरे घोड़े तुम्हारे घोड़ों के समान हैं।” फिर उसने पूछा, “हम किस मार्ग से चलेंगे?” यहोराम बोला, “एदोम के जंगल के मार्ग से।”
अतः इस्राएल, यहूदा, और एदोम का राजा भी अपनी-अपनी सेनाओं के साथ चल पड़े। वे सात दिनों तक चक्करदार मार्ग से होते हुए आगे बढ़े, किंतु सेनाओं और उनके पशुओं के लिए पानी नहीं मिला। सबके होठ फटने लगे, आँखों में थकान और चिंता के भाव उतर आए। इस्राएल का राजा यहोराम बेचैन हो उठा। उसने कहा, “क्या तुम देख रहे हो? यहोवा ने हम तीनों राजाओं को मोआब के हाथ में पड़ने के लिए बुलाया है!”
यहोशापात, जो धर्मी राजा था, बोला, “क्या यहाँ कोई यहोवा का नबी नहीं है, जिसके द्वारा हम यहोवा की इच्छा पूछ सकें?” तब इस्राएल के राजा के एक कर्मचारी ने उत्तर दिया, “यहाँ शापात का पुत्र एलीशा है, जो एलिय्याह के हाथ पर पानी डाला करता था।” यहोशापात तुरंत बोला, “उसके पास यहोवा का वचन है।” अतः तीनों राजा – इस्राएल, यहूदा और एदोम – एलीशा के पास गए।
जब एलीशा के सामने यहोराम आया, तो एलीशा ने कड़े स्वर में कहा, “तू मुझसे क्या चाहता है? अपने पिता के नबियों और अपनी माता के नबियों के पास जा।” यहोराम ने विनती की, “नहीं, क्योंकि यहोवा ने ही हम तीनों राजाओं को बुलाया है, कि हम मोआब के हाथ में पड़ जाएँ।” एलीशा ने उत्तर दिया, “यहोवा के जीवन की शपथ, जिसके सामने मैं खड़ा हूँ, यदि मैं यहूदा के राजा यहोशापात का आदर न करता, तो तुझ पर दृष्टि भी न करता।”
फिर एलीशा ने कहा, “मेरे लिए एक वीणा बजानेवाला लाओ।” और जब वीणा बजने लगी, तो यहोवा की शक्ति एलीशा पर उतरी। उसने कहा, “यहोवा यह कहता है: इस तराई में गढ़े-गढ़े बनाओ। क्योंकि यहोवा यह कहता है कि न तो तुम हवा देखोगे, न वर्षा, तौभी यह तराई जल से भर जाएगी; और तुम, तुम्हारे पशु और तुम्हारे बोझा ढोनेवाले पशु पीयेंगे। यह यहोवा के लिए तुच्छ बात है। वह मोआब को भी तुम्हारे हाथ में कर देगा।”
और ऐसा ही हुआ। अगले दिन प्रातःकाल, जब बलि चढ़ाई जाती है, तब एदोम की दिशा से जल बहकर आया, और वह सारा क्षेत्र जल से भर गया। दूर-दूर तक, वह तराई पानी से चमकने लगी, जैसे कोई विशाल दर्पण धरती पर रख दिया गया हो।
मोआबियों ने जब सुना कि तीनों राजा उनके विरुद्ध चढ़ाई करने आ रहे हैं, तो उन्होंने हर एक सक्षम व्यक्ति को हथियार बाँधकर सीमा पर तैनात कर दिया। प्रातः जब सूरज निकला, उसकी किरणें पानी पर पड़ीं, और मोआब के लोगों को वह दूर से लहू जैसा दिखाई दिया। वे चिल्लाए, “यह लहू है! निश्चय ही राजाओं ने आपस में युद्ध किया है और एक-दूसरे को मार डाला है। अब हे मोआब, लूट के लिए तैयार हो जाओ!”
वे उत्साह से भरकर इस्राएल के शिविर की ओर दौड़े। किंतु जैसे ही वे पहुँचे, इस्राएलियों ने उन पर हमला कर दिया। मोआब भाग खड़ा हुआ, और इस्राएली उनके पीछे-पीछे बढ़ते हुए उनके देश में घुस गए। उन्होंने नगरों को नष्ट किया, हर अच्छी भूमि पर पत्थर फेंके, हर कुएँ को बंद किया, और हर अच्छे वृक्ष को काट डाला। केवल किर हरसेथ के गढ़ ही बचे, जिस पर गोफन फेंकनेवालों ने उसे घेर लिया।
मोआब के राजा मेशा ने देखा कि युद्ध उसके विरुद्ध बहुत भयंकर हो गया है। उसने सात सौ पुरुषों के साथ निकलकर एदोम के राजा पर आक्रमण करने की कोशिश की, किंतु सफल नहीं हुआ। तब उसने अपने ज्येष्ठ पुत्र को, जो उसके बाद राजा होता, लेकर शहर की दीवार पर चढ़ाकर होमबलि के रूप में चढ़ा दिया। यह देख इस्राएल पर बड़ा क्रोध उत्पन्न हुआ, और वे उसके देश से हट गए, अपने अपने स्थान को लौट आए।
और इस प्रकार, उस सूखे तराई में पानी का चमत्कार, और मोआब पर विजय, यहोवा के वचन का पालन हुआ। परन्तु मेशा की पराजय में भी एक गहरा दुःख छिपा था, एक पिता का वह असह्य निर्णय जिसने इतिहास के पन्नों में एक काले धब्बे की तरह अपनी जगह बना ली।




