पवित्र बाइबल

पवित्रता का पाठ

धूप चट्टानों पर तप रही थी, और हवा में धूल के महीन कण तैरते दिखाई देते थे। एलियाकीम अपने खेमे के बाहर एक पत्थर पर बैठा, अपनी हथेलियों को देख रहा था। उसके सिर के बाल उलझे हुए थे, और गालों पर धूल और पसीने की एक परत जमी हुई थी। पिता का देहांत हुए अब चालीस दिन बीत चुके थे, और आज ही सुबह बुजुर्गों में से एक, शिमोन, उसके पास आया था और उससे कहा था, “बेटा, अब शोक मनाना छोड़ दो। अपने सिर के बाल नोंचना बंद करो, और अपनी दाढ़ी के बाल न मुंडवाओ। यह हमारे परमेश्वर यहोवा की आज्ञा है। हम उन अन्यजातियों के समान नहीं हैं जो मरे हुओं के लिए अपने शरीर को काट-छाँट करते हैं। हम उसके लिए पवित्र लोग हैं।”

ये शब्द एलियाकीम के मन में गूँज रहे थे। शोक मनाने का यह तरीका, यह शारीरिक पीड़ा, उसे लगता था जैसे उसके दुःख का एक ठोस रूप है। इसे छोड़ने का मतलब था जैसे पिता को भूलना शुरू कर देना। उसने एक लम्बी सांस ली और आँखें बंद कर लीं। तभी एक छाया उस पर पड़ी। शिमोन फिर से खड़ा था, उसके हाथ में एक छोटा सा चमड़े का थैला और एक लाठी थी।

“उठो, नौजवान,” शिमोन ने कहा, उसकी आवाज़ में कोमलता थी लेकिन दृढ़ता भी। “शब्दों से अधिक, कर्म शिक्षा देते हैं। आज मैं तुम्हें शिलो के लिए रास्ते पर ले चलता हूँ। हमें यरदन पार के अपने भाइयों के लिए एक भेड़ खरीदनी है। और रास्ते में, मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि ‘पवित्र’ होने का अर्थ केवल शोक के नियम ही नहीं है। यह जीवन के हर कण में है, यहाँ तक कि उस भोजन में भी जो हम अपने मुंह में डालते हैं।”

यात्रा शुरू हुई। रेगिस्तान का विस्तार दूर तक फैला था, केवल कहीं-कहीं झाड़ियों के झुरमुट दिखाई देते थे। शिमोन चलते-चलते बोल रहा था, “सुनो, एलियाकीम। हम जो खाते-पीते हैं, उस पर भी परमेश्वर की मुहर लगी है। वह हमें हर प्रकार का जानवर खाने की अनुमति नहीं देता। उसने स्पष्ट किया है। सोचो, जो पशु अपने खुर को फाड़ता है और जुगाली करता है – गाय, बकरी, भेड़, हिरन – वे तुम्हारे लिए शुद्ध हैं। पर जो केवल एक ही चीज़ करते हैं, केवल जुगाली करते हैं या केवल खुर फाड़ते हैं, वे नहीं। ऊँट तो जुगाली करता है, पर उसके खुर नहीं फटे होते। वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है। सुअर… हाँ, सुअर के खुर तो फटे होते हैं, पर वह जुगाली नहीं करता। वह भी अशुद्ध। उसे न तो खाना है, न ही उसका स्पर्श करना है। ये नियम मनमाने नहीं हैं, बेटा। ये हमारी पहचान हैं। ये हमें याद दिलाते हैं कि हमें चुनकर अलग किया गया है।”

एलियाकीम चुपचाप सुन रहा था। उसने कभी इन नियमों को इतने गहराई से नहीं सोचा था। वे तो बस नियम थे, जो बचपन से सुनते आया था। शिमोन ने जारी रखा, “और जलचर जीव? जिनके पंख और शल्क हैं, वे शुद्ध हैं। मछली, वे तो ठीक हैं। पर जिनमें पंख और शल्क नहीं – वे सब घिनौने हैं। समुद्री घोंघे, झींगे, वे सब। उनसे दूर रहो।”

दोपहर ढलने लगी थी जब वे एक छोटे से बाज़ार के पास पहुँचे, जहाँ कुछ यात्री डेरा डाले हुए थे। वहाँ एक व्यापारी कुछ पक्षियों को पिंजरों में बेच रहा था। शिमोन ने उंगली से इशारा किया, “देखो, उल्लू, चील, गिद्ध… ये सब हमारे लिए वर्जित हैं। वे मांसाहारी हैं, मरा हुआ खाते हैं। हमें उनसे अलग रहना है। पर कबूतर, तीतर, जैसे पक्षी, वे शुद्ध हैं।”

एलियाकीम ने पूछा, “लेकिन शिमोन चाचा, अगर हम कहीं यात्रा कर रहे हों और दूर देश में कोई हमें ऐसा मांस परोसे जो हम नहीं पहचानते, तो?”

शिमोन मुस्कुराया, “तुम उसे छोड़ दो। अपने परमेश्वर के भय में जीने का यही अर्थ है – चुनाव करना। यहाँ तक कि जो कीड़े हैं, उनमें भी नियम हैं। टिड्डा, झींगा, ये शुद्ध हैं। बाकी सब अशुद्ध। और याद रखो, तुम अपने बछड़े या बकरी के बच्चे को उसके माँ के दूध में नहीं पकाओगे। यह भी एक आज्ञा है।”

ये सारे नियम अब एलियाकीम को केवल सूची नहीं लग रहे थे। वे एक बुनावट की तरह लग रहे थे, एक ऐसा जाल जो उनके सम्पूर्ण जीवन को परमेश्वर की इच्छा से बुनता है। शोक के नियम भी अब उसे अलग नहीं लग रहे थे। वे भी इसी बुनावट का हिस्सा थे – एक पवित्र, अलग किए हुए लोग होने का।

शिलो पहुँचकर, उन्होंने एक स्वस्थ, कोमल भेड़ खरीदी। वापसी की यात्रा शांत थी। एलियाकीम का मन हल्का हो गया था। उसे लगा जैसे उसने पिता को एक नए तरीके से याद करना सीख लिया है – बिना शरीर को काटे-छाँटे, बल्कि अपनी पवित्रता को बनाए रखकर, जो परमेश्वर की सबसे बड़ी देन थी।

शाम को, खेमे के पास वापस आकर, जब उसने अपने हाथ धोए और भोजन के लिए बैठा, तो उसकी नज़र उस भेड़ पर पड़ी जो शांत चर रही थी। उसने महसूस किया कि आज्ञाएँ कोरे नियम नहीं, बल्कि जीवन के चारों ओर एक सुरक्षा-रेखा हैं, जो उन्हें परमेश्वर के निकट बनाए रखती हैं। और इस विचार में एक गहरी शान्ति थी, जो शोक से कहीं अधिक स्थायी थी। हवा में ठंडक आने लगी थी, और पहले तारे टिमटिमा रहे थे। एलियाकीम ने आँखें उठाईं और एक लम्बी, शांत सांस ली। वह अब अकेला नहीं था। वह एक बड़े परिवार, एक पवित्र लोगों का हिस्सा था। और यही ज्ञान, उसके घावों पर मरहम की तरह था।

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