पवित्र बाइबल

पतन की छाया में नबी

वह समय था जब उत्तर के पहाड़ी राज्य का नाम सुनकर ही लोगों की आँखों में चमक आ जाती थी। दान का इलाका, जहाँ जैतून के पेड़ इतने घने थे कि धूप को जमीन तक आने में मुश्किल होती। लेकिन अब तो सब कुछ बदल सा गया था। हवा में एक अजीब सी गंध घुली रहती – आशंका की, बिगड़ती फसल की, या शायद आने वाले संकट की।

यहोवा का नबी, होशे, एक दिन गिबा के पास के खेतों से गुजर रहा था। आम के पेड़ों पर फल तो लगे थे, पर वे सख्त और छोटे थे, जैसे किसी ने उनकी मिठास चूस ली हो। कुछ दूर पर, एक गाँव में त्योहार की तैयारियाँ चल रही थीं। औरतें नए वस्त्र पहने हुई थीं, उनकी हँसी दूर तक सुनाई दे रही थी। एक ऊँचे स्थान पर, बाल देवता की एक मूर्ति के सामने, युवक युवतियाँ नाच रहे थे। उनकी आँखों में उल्लास था, पर होशे को वह उल्लास झूठा लगा। यह वह उल्लास नहीं था जो यहोवा की फसल कटाई के पर्व में होता था। यह तो बस देह का नाच था, भूखी आत्माओं का शोर।

वह एक पुराने अंजीर के पेड़ के नीचे बैठ गया। उसकी आँखें देख रही थीं कि कैसे इन लोगों ने यहोवा के साथ विश्वासघात किया था। वे मिस्र की ओर देखते, अश्शूर के राजाओं से दोस्ती करते, और सोचते थे कि यही बुद्धिमानी है। परमेश्वर के नियमों को उन्होंने एक बोझ समझ लिया था। बाल पूजा के उनके रीति-रिवाज, वे अनुष्ठान जिनमें अशुद्धता और व्यभिचार छिपा था – यह सब उनके हृदय की दूरी को दर्शाता था।

होशे की स्मृति में वे दिन ताजा हो आए जब प्रभु ने पहली बार उससे बात की थी। “जाओ,” उसकी आवाज में दर्द था, “इस कुलीन वेश्या से विवाह करो, क्योंकि यह देश यहोवा के साथ वेश्यावृत्ति कर रहा है।” और अब, वह सब सच होते देख रहा था। उनकी खुशियाँ कच्ची फसल की तरह थीं, जो देखने में हरी-भरी लगे, पर अन्दर से खोखली। यहोवा का क्रोध उन पर छाया हुआ था, पर वे उसे पहचान नहीं पा रहे थे।

एक बूढ़ा किसान, जिसके हाथ मिट्टी से सने थे, पास से गुजरा। उसके चेहरे पर गहरी झुर्रियाँ थीं, जैसे सूखी नदी की धारा। “नबी,” उसने आवाज दी, आवाज में एक थकान थी, “इस बार की फसल में कीड़े पड़ गए हैं। गेहूँ के दाने सूने हैं। ऐसा लगता है जैसे भूमि अपना रस खो चुकी है।”

होशे ने उसकी ओर देखा। “भूमि नहीं, तुम्हारे हृदय ने अपनी शुद्धता खो दी है,” वह बोला, पर उसका स्वर कोरा उपदेश नहीं था। उसमें एक गहरा शोक था, जैसे कोई पिता अपनी सन्तान को बर्बाद होते देख रहा हो। “तुमने विदेशी देवताओं के चरणों में अपनी उपज चढ़ाई। अब यहोवा तुम्हारे खलिहानों को उजाड़ देगा। तुम नाचोगे, पर तुम्हारे नाच में आनन्द नहीं, विषाद होगा। तुम दाखरस पियोगे, पर वह तुम्हारे कंठ में कड़वाहट बन जाएगा।”

बूढ़े किसान की आँखों में एक चमक आई, जैसे उसे अचानक किसी सत्य का आभास हुआ हो। पर वह चमक क्षण भर में ही बुझ गई। वह सिर झुकाए चला गया, अपने खाली खलिहान की ओर।

दिन ढलने लगा। पश्चिम का आकाम लालिमा से भर गया, पर वह लालिमा सुन्दर नहीं, भयावह लग रही थी। होशे ने महसूस किया कि उसके शब्द हवा में विलीन हो रहे हैं। वे लोग सुनते तो थे, पर समझते नहीं थे। उनका हृदय इतना कठोर हो चुका था कि परमेश्वर की आवाज उसमें प्रतिध्वनित नहीं होती थी।

वह उठा और एक टीले पर चढ़ गया। नीचे, घाटी में, इज़राइल के घर बसे हुए थे। धुएँ के कुंडल चिमनियों से उठ रहे थे। सामान्य जीवन का दृश्य था। पर होशे की आँखें उस सामान्यता के पार देख रही थीं। उसे एक भविष्य दिखाई दे रहा था – एक ऐसा भविष्य जिसमें ये घर खाली होंगे, ये खेत उजड़े होंगे। अश्शूर की सेना, लोहे के हथियारों और बेरहम आँखों वाली, इस भूमि पर कब्जा करेगी। लोग बंधक बनाकर ले जाए जाएँगे, विदेशी भूमि में, जहाँ उनके देवता बेकार के लकड़ी और पत्थर के टुकड़े होंगे। वहाँ, एक अशुद्ध देश में, उनकी भेंटें यहोवा को नहीं चढ़ाई जा सकेंगी। उनकी रोटी शोकियों की रोटी बन जाएगी, जिसे खाने वाला अशुद्ध हो जाता है।

एक ठंडी हवा ने उसके चोगे के किनारे को हिला दिया। होशे का मन भारी था। वह जानता था कि यह सजा निष्ठुर नहीं, न्यायसंगत थी। वे बीज बो चुके थे, अब कटाई तो करनी ही थी। उन्होंने भविष्यद्वक्ताओं को पागल कहा था, परमेश्वर के दूतों से घृणा की थी। अब उन भविष्यद्वक्ताओं के मुँह बंद हो जाएँगे। प्रभु का आत्मा उनसे अलग हो जाएगा। और फिर, केवल खामोशी रहेगी – एक भयानक, सुनसान खामोशी, जिसमें परमेश्वर की आवाज का अभाव सबसे बड़ा दंड होगा।

रात हो गई। आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे, पर वे भी दूर और उदासीन लग रहे थे। होशे ने अपना सिर घुटनों के बीच दबा लिया। उसकी आँखों से आँसू नहीं थे। वहाँ एक गहरा, सूखा दुःख था। उसे याद आया कि कैसे इफ्रैम की महिमा एक पक्षी की तरह उड़ जाएगी। प्रसव-वेदना के बिना जन्म, गर्भधारण के बिना गर्भ, गर्भ की आयु के बिना संतान – यानी एक राष्ट्र का अस्तित्व ही मिट जाना।

पर इस सबके बीच, होशे के हृदय में एक छोटी सी चिंगारी भी थी। यह निराशा का अंत नहीं था। यहोवा का प्रेम अग्नि की तरह था, जो भस्म भी करता है और शुद्ध भी। यह न्याय, इस विद्रोही पीढ़ी के लिए तो विनाश था, पर शायद किसी दूर के भविष्य के लिए, एक नई शुरुआत की जुताई।

उसने अपना सिर उठाया। अँधेरे में भी, उसे एक रास्ता दिखाई दिया – वह रास्ता जो इस घाटी से निकलकर पहाड़ियों के पार जाता था। उसे चलना था। उसे बोलना था। भले ही कोई न सुने, भले ही उसके शब्द हवा में बिखर जाएँ। क्योंकि नबी का काम न्याय की घोषणा करना था, और उस घोषणा के शब्दों में ही, परमेश्वर के अटल सत्य का एक अंश सदा के लिए अंकित हो जाता है। और कौन जाने, शायद आने वाली पीढ़ियों में कोई इन शब्दों को पढ़े, और अपने हृदय को मोड़ ले।

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