पवित्र बाइबल

दुष्ट का क्षणभंगुर आनंद

उस कस्बे में धूल ही धूल थी। रास्तों पर उड़ती हुई मिट्टी, दूर तक फैले सूखे आकाश के नीचे, ऐसा लगता था जैसे प्रभु ने रंगों का घड़ा ही उलट दिया हो। बस पीला और भूरा, और कहीं-कहीं किसी झरबेरी के पेड़ का हरा-सा धब्बा। ऐसे ही एक दिन, जब हवा में गर्मी तैर रही थी, नाहोर का बेटा सोफर बोला। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा कंपकंपाहट थी, जैसे कोई बाँसुरी जो बहुत तेज़ बजाने के लिए बनी ही नहीं।

वह अय्यूब की ओर देखकर बोला, “सुन, मेरे मन के विचार मुझे जवाब देते हैं, और इसी कारण मेरी बेचैनी भी। मैंने अपनी नाराज़गी की ऐसी दाद सुनी है, मेरा समझदार हृदय मुझे जवाब देता है। क्या तू यह जानता है कि दुष्ट का आनंद, और हठीले का हर्ष, एक क्षण के लिए है?”

उसकी आँखें दूर, क्षितिज पर टिकी हुई थीं, मानो वहाँ कोई चित्र बन रहा हो। “वह आकाश तक ऊँचा हो जाता है, और उसका सिर बादलों से लगता है। पर उसका मल, सड़ांध की तरह, हमेशा के लिए मिट जाता है। जो उसे देखते थे, वे कहेंगे, ‘वह कहाँ गया?’ वह स्वप्न की तरह उड़ जाएगा, और उनका पता नहीं चलेगा। उसे देखने वाली आँखें फिर उसे नहीं देखेंगी।”

सोफर ने अपना हाथ हवा में घुमाया, जैसे कोई चीज़ बिखेर रहा हो। “उसके बच्चे गरीबों से मेहरबानी माँगेंगे, और उसके हाथों ने उसकी दौलत फिर लौटा दी। उसकी हड्डियाँ जवानी से भरी थीं, पर वही धूल में सोएँगी।”

एक कौआ किसी टूटी हुई दीवार पर बैठा काँव-काँव कर रहा था। सोफर की नज़र उस पर टिक गई, जैसे वह उसका प्रमाण हो। “अगर बुराई उसके मुँह में मीठी लगी, अगर उसने उसे जीभ के तले छिपा रखा, अगर वह उसे नहीं छोड़ता और उसे अपने तालू में रोक रखता है… तो भी उसका भोजन उसकी अँतड़ियों में बदल जाएगा। उसके भीतर साँपों का जहर बन जाएगा। उसने दौलत निगली, उसे उगल देगा। परमेश्वर उसे उसके पेट से निकाल बाहर करेगा।”

उसने एक लम्बी, थकी हुई साँस ली। हवा में धूल के कण चमक रहे थे। “वह जहरीले साँप का सा दूध चूसेगा, और विषैले सर्प की जीभ उसे मार डालेगी। वह नदियों, शहद की धाराओं को नहीं देखेगा। वह मेहनत की कमाई को हज़म नहीं कर पाएगा, और अपनी दौलत के आनंद में हिला नहीं पाएगा। क्योंकि उसने गरीबों को दबाया, उन्हें छोड़ दिया। उसने घर जो हड़पा, उसे बनाया नहीं।”

कहानी एक बनिए की याद आती है, जो इसी कस्बे में रहता था। नाम था उसका कीला। वह चालाक था, नाप-तौल में उँगलियाँ फेर देता। उसने छोटे-छोटे किसानों से सूद पर अनाज दिया, और फिर अकाल के दिनों में उनकी ज़मीनें हड़प लीं। उसका घर बड़ा हुआ, पक्की ईंटों का। उसके बरामदे में महीन कालीन बिछे। उसकी कोठी में अनाज के ढेर लगे रहते, जबकि बाहर माँएँ अपने बच्चों को भूख से सुलातीं।

एक बार कीला ने एक विधवा से उसकी एकमात्र बकरी का बच्चा, बदले में एक बोरी घटिया चावल देकर, ऐसे हथिया लिया कि उसके हाथ में कुछ आया ही नहीं। उस रात उसने मीठी दारू पी और अपने लड़कों से कहा, “देखो, जीवन को मज़बूत हाथों से पकड़ो। दया तो कमज़ोरों का शस्त्र है।”

पर जैसे सोफर कह रहा था, दुष्ट का आनंद क्षणभंगुर होता है। कीला के शरीर में एक दर्द उठा। पहले तो उसने सोचा, ज़्यादा भोजन है। फिर वह दर्द उसके पेट में गहरा होता गया, जैसे कोई मुड़ा हुआ लोहा अंदर घूम रहा हो। वैद्य आए, उन्होंने जड़ी-बूटियाँ दीं। पर दर्द नहीं गया। वह उसके अंग-अंग में फैल गया, जैसे उसने जो विष अपने जीवन में बोया था, वही अब फल दे रहा था।

उसकी कोठी में अनाज सड़ने लगा। चूहे पैदा हो गए। उसके लड़के आपस में लड़ने लगे कि जायदाद किसे मिले। और एक सुबह, जब सूरज ने फिर से उस कस्बे की धूल को सुनहरा कर दिया, कीला का निधन हो गया। उसका भव्य घर खामोश पड़ा रहा। कुछ ही समय में, उसकी दौलत बिखर गई। विधवा की बेटी ने, जो अब जवान हो गई थी, बाज़ार में कीला के एक बेटे को भीख माँगते देखा। उसने चुपचाप उसके हाथ में एक रोटी रख दी, और आगे बढ़ गई।

सोफर की आवाज़ फिर गूँजी, धीरे, लेकिन गंभीर। “आकाश उसका अधर्म प्रकट करेगा, और धरती उसके खिलाफ उठ खड़ी होगी। उसके घराने की उपज बह जाएगी, उसके परमेश्वर के क्रोध के दिन बह जाएगी। यही दुष्ट मनुष्य का परमेश्वर से मिलने वाला भाग है, और उसके लिए ईश्वर ने जो विरासत ठहराई है।”

वह चुप हो गया। केवल धूल भरी हवा का सन्नाटा था। अय्यूब ने अपना मुँह नहीं खोला। उसकी आँखों में एक ऐसा दर्द था जो सारे उपदेशों से गहरा था। कहानी ख़त्म हुई। पर सबक… वह तो हवा में तैर रहा था, उस कड़ी धूप में, उन सूखे पेड़ों की शाखाओं पर, हर उस इंसान के दिल में जो सुनने को तैयार था।

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