**व्यवस्थाविवरण 14: एक पवित्र जीवन की यात्रा**
एक समय की बात है, जब इस्राएल के लोग मिस्र की गुलामी से छुटकारा पाकर मूसा के नेतृत्व में वादा किए गए देश की ओर बढ़ रहे थे। वे जंगलों और पहाड़ों से गुजरते हुए, परमेश्वर की आज्ञाओं को सीख रहे थे। मूसा, परमेश्वर के सेवक, ने उन्हें बुलाया और कहा, “हे इस्राएल के लोगो, तुम परमेश्वर के पवित्र लोग हो। तुम्हें उसकी आज्ञाओं का पालन करना चाहिए और उसके मार्ग पर चलना चाहिए।”
मूसा ने उन्हें व्यवस्थाविवरण 14 के वचन सुनाए, जो उनके जीवन को पवित्र और परमेश्वर के प्रति समर्पित बनाने के लिए थे। उसने कहा, “तुम अपने शरीर को काट-छांट कर शोक न मनाना, और न ही अपने सिर के बाल मुंडाना। तुम परमेश्वर के पवित्र लोग हो, और उसने तुम्हें पृथ्वी की सभी जातियों में से अपनी निज संपत्ति के रूप में चुना है।”
मूसा ने उन्हें समझाया कि परमेश्वर चाहता है कि उसके लोग शुद्ध और पवित्र रहें, न कि दुनिया के तरीकों से मिलकर अपने आप को अशुद्ध करें। उसने कहा, “तुम्हें केवल उन्हीं जानवरों का मांस खाना चाहिए जो शुद्ध हैं। गाय, भेड़, बकरी, हिरण, और अन्य जानवर जो खुर फाड़ते हैं और जुगाली करते हैं, वे तुम्हारे लिए शुद्ध हैं। परन्तु ऊंट, खरगोश, और सुअर, जो खुर तो फाड़ते हैं पर जुगाली नहीं करते, वे तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं। तुम्हें उनका मांस नहीं खाना चाहिए।”
मूसा ने उन्हें पानी के जीवों के बारे में भी बताया, “जो जलचर पंख और शल्क रखते हैं, वे तुम्हारे लिए शुद्ध हैं। परन्तु जिनके पास पंख और शल्क नहीं हैं, वे तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं। तुम्हें उन्हें नहीं खाना चाहिए।”
फिर उसने पक्षियों के बारे में बताया, “गिद्ध, चील, उल्लू, और अन्य मांसाहारी पक्षी तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं। तुम्हें उनका मांस नहीं खाना चाहिए। परन्तु कबूतर, तीतर, और अन्य शुद्ध पक्षी तुम्हारे लिए खाने योग्य हैं।”
मूसा ने उन्हें यह भी सिखाया कि परमेश्वर चाहता है कि उसके लोग उसके प्रति वफादार रहें और उसकी आज्ञाओं का पालन करें। उसने कहा, “तुम्हें अपने खेतों और बागों में दशमांश अलग करना चाहिए। यह परमेश्वर का हिस्सा है। तुम्हें उसे उसके घर में ले जाना चाहिए और उसके सामने खुशी से उसे चढ़ाना चाहिए। यह तुम्हारे परमेश्वर के प्रति आभार और समर्पण का प्रतीक है।”
मूसा ने उन्हें यह भी बताया कि यदि वे परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करेंगे, तो वह उन्हें आशीष देगा। उसने कहा, “यदि तुम परमेश्वर की आज्ञाओं को मानोगे और उसके मार्ग पर चलोगे, तो वह तुम्हें समृद्धि और शांति देगा। तुम्हारे खेत उपजाऊ होंगे, तुम्हारे पशु स्वस्थ होंगे, और तुम्हारे बच्चे सुरक्षित रहेंगे।”
इस्राएल के लोगों ने मूसा की बातें ध्यान से सुनीं और उन्हें अपने हृदय में संजो लिया। वे जानते थे कि परमेश्वर उनसे प्यार करता है और उन्हें एक पवित्र जीवन जीने के लिए बुलाया है। उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करेंगे और उसके मार्ग पर चलेंगे।
मूसा ने उन्हें आश्वासन दिया, “यदि तुम परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करोगे, तो वह तुम्हारे साथ रहेगा और तुम्हें सफलता देगा। तुम्हें उसकी आशीषें मिलेंगी, और तुम उसके पवित्र लोग बन जाओगे।”
इस्राएल के लोगों ने मूसा की बातों को गंभीरता से लिया और उन्हें अपने जीवन में लागू करने का प्रयास किया। वे जानते थे कि परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना उनके लिए आशीष का मार्ग है। उन्होंने अपने जीवन को पवित्र बनाने और परमेश्वर के प्रति समर्पित रहने का निर्णय लिया।
इस प्रकार, इस्राएल के लोग परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करते हुए, उसके पवित्र लोग बन गए। उन्होंने अपने जीवन को परमेश्वर के प्रति समर्पित कर दिया और उसकी आशीषों का आनंद लिया। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना और उसके मार्ग पर चलना हमारे जीवन को आशीषित बनाता है।