यह कहानी प्रकाशितवाक्य अध्याय 3 पर आधारित है, जिसमें यीशु मसीह सात कलीसियाओं को संदेश भेजते हैं। हम इसे विस्तार से और विवरणपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करेंगे, जो हिंदी बाइबल की शैली में होगा।
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### सात कलीसियाओं को यीशु का संदेश
एक बार की बात है, जब यूहन्ना नामक एक शिष्य, जो पतमुस द्वीप पर था, को परमेश्वर की ओर से एक अद्भुत दर्शन दिखाया गया। यह दर्शन यीशु मसीह का था, जो स्वर्ग में सिंहासन पर विराजमान थे। यीशु ने यूहन्ना को सात कलीसियाओं को संदेश भेजने के लिए कहा। ये कलीसियाएँ एशिया नामक प्रदेश में स्थित थीं: इफिसुस, स्मुरना, पर्गमुस, थुआतीरा, सरदीस, फिलदिलफिया और लौदीकिया। यीशु ने हर कलीसिया को उसकी स्थिति के अनुसार एक विशेष संदेश दिया।
#### 1. इफिसुस की कलीसिया को संदेश
यीशु ने इफिसुस की कलीसिया से कहा, “मैं तुम्हारे कार्यों और परिश्रम को जानता हूँ। तुम बुराई को सहन नहीं करते और झूठे प्रेरितों को परखकर उन्हें पहचान लेते हो। तुमने मेरे नाम के लिए बहुत कष्ट सहे हैं और थकते नहीं। परन्तु मैं तुम्हारे विरुद्ध यह कहता हूँ कि तुमने अपनी पहली प्रेम को छोड़ दिया है। इसलिए पश्चाताप करो और वही कार्य करो जो पहले करते थे। यदि तुम पश्चाताप नहीं करोगे, तो मैं तुम्हारे दीपक को उसके स्थान से हटा दूंगा।”
#### 2. स्मुरना की कलीसिया को संदेश
स्मुरना की कलीसिया को यीशु ने कहा, “मैं तुम्हारे क्लेश और दरिद्रता को जानता हूँ, परन्तु तुम धनी हो। मैं उन लोगों के विषय में जानता हूँ जो स्वयं को यहूदी कहते हैं, परन्तु वे यहूदी नहीं हैं, बल्कि शैतान की सभा हैं। तुम्हें डरने की आवश्यकता नहीं है। शैतान तुम में से कुछ को कारागार में डालेगा, और तुम दस दिन तक क्लेश उठाओगे। परन्तु मृत्यु तक विश्वासी बने रहो, और मैं तुम्हें जीवन का मुकुट दूंगा।”
#### 3. पर्गमुस की कलीसिया को संदेश
पर्गमुस की कलीसिया को यीशु ने कहा, “मैं जानता हूँ कि तुम कहाँ रहते हो, जहाँ शैतान का सिंहासन है। तुम मेरे नाम पर दृढ़ बने रहे हो और मेरे विश्वास को नहीं छोड़ा, यहाँ तक कि मेरे विश्वासी अन्तिपास की हत्या के दिनों में भी। परन्तु मेरे विरुद्ध कुछ बातें हैं: तुम में से कुछ बिलाम की शिक्षा को मानते हैं, जो लोगों को मूर्तिपूजा और व्यभिचार की ओर ले जाती है। इसलिए पश्चाताप करो, नहीं तो मैं तुम्हारे विरुद्ध युद्ध करूंगा।”
#### 4. थुआतीरा की कलीसिया को संदेश
थुआतीरा की कलीसिया को यीशु ने कहा, “मैं तुम्हारे प्रेम, विश्वास, सेवा और धैर्य को जानता हूँ। तुम्हारे अन्तिम कार्य पहले से अधिक हैं। परन्तु मैं तुम्हारे विरुद्ध यह कहता हूँ कि तुम उस स्त्री ईज़ेबेल को सहन करते हो, जो स्वयं को भविष्यवक्ता कहती है और मेरे सेवकों को व्यभिचार और मूर्तिपूजा की ओर ले जाती है। मैंने उसे पश्चाताप का समय दिया, परन्तु उसने पश्चाताप नहीं किया। इसलिए मैं उसे बीमारी की शैय्या पर डालूंगा। जो उसकी शिक्षाओं को मानते हैं, उन्हें भी बड़ा क्लेश होगा। परन्तु जो विजयी होते हैं और अन्त तक मेरे कार्यों को करते हैं, उन्हें मैं सुबह का तारा दूंगा।”
#### 5. सरदीस की कलीसिया को संदेश
सरदीस की कलीसिया को यीशु ने कहा, “मैं तुम्हारे कार्यों को जानता हूँ। तुम्हारा नाम जीवित है, परन्तु तुम मर चुके हो। जागो और उन बातों को स्थिर करो जो शेष हैं और मरने वाली हैं। मैंने तुम्हारे कार्यों को परमेश्वर के सामने पूरा नहीं पाया है। इसलिए याद रखो कि तुमने क्या सुना और ग्रहण किया है, और उस पर दृढ़ रहो। यदि तुम जागृत नहीं होगे, तो मैं चोर की तरह आऊंगा, और तुम नहीं जानोगे कि मैं किस घड़ी आऊंगा।”
#### 6. फिलदिलफिया की कलीसिया को संदेश
फिलदिलफिया की कलीसिया को यीशु ने कहा, “मैं तुम्हारे कार्यों को जानता हूँ। मैंने तुम्हारे सामने एक खुला द्वार रखा है, जिसे कोई बंद नहीं कर सकता। तुम्हारी शक्ति थोड़ी है, परन्तु तुमने मेरे वचन को माना है और मेरे नाम को नहीं ठुकराया है। देखो, मैं उन्हें जो शैतान की सभा से हैं, तुम्हारे पास आकर तुम्हारे पैरों पर दण्डवत कराऊंगा। मैं तुम्हें परीक्षा के घड़ी से बचाऊंगा। इसलिए दृढ़ बने रहो, और मैं तुम्हें अपने परमेश्वर के मन्दिर में एक स्तम्भ बनाऊंगा।”
#### 7. लौदीकिया की कलीसिया को संदेश
लौदीकिया की कलीसिया को यीशु ने कहा, “मैं तुम्हारे कार्यों को जानता हूँ। तुम न तो ठंडे हो और न गर्म। काश कि तुम ठंडे या गर्म होते! परन्तु क्योंकि तुम गुनगुने हो, और न तो ठंडे और न गर्म, मैं तुम्हें अपने मुंह से उगल दूंगा। तुम कहते हो कि मैं धनी हूँ और मुझे किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है, परन्तु तुम नहीं जानते कि तुम दरिद्र, दीन-हीन और अन्धे हो। मैं तुम्हें सलाह देता हूँ कि मुझ से सोना खरीदो जो आग में तपा हुआ है, ताकि तुम धनी हो जाओ। जो मैं डांटता और ताड़ना देता हूँ, उससे प्रेम रखता हूँ। इसलिए उत्साहित हो जाओ और पश्चाताप करो। देखो, मैं द्वार पर खड़ा हूँ और खटखटाता हूँ। यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास आकर उसके साथ भोजन करूंगा।”
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यीशु के ये संदेश हर कलीसिया को उसकी स्थिति के अनुसार दिए गए थे। उन्होंने हर कलीसिया को उसकी कमियों और गलतियों के लिए चेतावनी दी, परन्तु साथ ही उन्हें आशा और प्रोत्साहन भी दिया। यीशु ने उनसे कहा कि जो विजयी होगा, उसे वह जीवन के मुकुट, स्वर्गीय आशीषें और अनन्त जीवन का वरदान देंगे। यह संदेश आज भी हर विश्वासी के लिए प्रासंगिक है, जो यीशु के पीछे चलने का निर्णय लेता है।