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परमेश्वर की आज्ञाओं का महत्व: मूसा का संदेश

**व्यवस्थाविवरण 4 की कहानी: परमेश्वर की आज्ञाओं का महत्व**

एक समय की बात है, जब इस्राएल के लोग मूसा के नेतृत्व में मिस्र की दासता से मुक्त होकर वादा किए हुए देश कनान की ओर बढ़ रहे थे। वे जंगलों और पहाड़ों से होकर गुजरते हुए, परमेश्वर के साथ अपनी यात्रा को जारी रखे हुए थे। मूसा, जो परमेश्वर के साथ घनिष्ठ संबंध रखता था, ने लोगों को इकट्ठा किया और उन्हें परमेश्वर की आज्ञाओं और व्यवस्थाओं के बारे में समझाने लगा।

मूसा ने लोगों से कहा, “हे इस्राएल के लोगो, सुनो! आज मैं तुम्हें परमेश्वर की व्यवस्थाएं और आज्ञाएं सिखाने जा रहा हूँ। इन्हें मन में बसा लो और इनका पालन करो, ताकि तुम जीवित रह सको और वादा किए हुए देश में प्रवेश कर सको। परमेश्वर ने हमें ये आज्ञाएं दी हैं, ताकि हम उनके अनुसार चलें और उनकी महिमा को प्रकट करें।”

मूसा ने आगे कहा, “तुमने देखा है कि परमेश्वर ने बाल-पोर के समय उन लोगों को कैसे दंडित किया, जो उसके मार्ग से भटक गए थे। परंतु जो लोग परमेश्वर के वचनों पर दृढ़ रहे, वे सुरक्षित रहे। इसलिए, परमेश्वर की आज्ञाओं को मत भूलो। उन्हें अपने हृदय में संजोकर रखो और अपने बच्चों को भी सिखाओ।”

मूसा ने लोगों को याद दिलाया कि परमेश्वर ने होरेब पर्वत पर उनके साथ एक विशेष वाचा बाँधी थी। उसने कहा, “तुमने परमेश्वर को आग के बीच से बोलते हुए सुना था, परंतु तुमने उसका कोई रूप नहीं देखा। इसलिए, सावधान रहो कि तुम किसी मूर्ति या किसी प्रतिमा को बनाकर उसकी पूजा न करो। परमेश्वर एक आत्मा है, और वह सर्वशक्तिमान है। उसकी तुलना किसी भी मनुष्य या प्राणी से नहीं की जा सकती।”

मूसा ने लोगों को चेतावनी दी, “यदि तुम परमेश्वर की आज्ञाओं को भूल जाओगे और उसके मार्ग से भटक जाओगे, तो तुम्हारा अंत बुरा होगा। परमेश्वर ने तुम्हें चुना है और तुम्हें एक विशेष लोग बनाया है। यदि तुम उसकी आज्ञाओं का पालन करोगे, तो वह तुम्हें आशीर्वाद देगा और तुम्हें सभी राष्ट्रों से ऊपर उठाएगा। परंतु यदि तुम उसकी अवज्ञा करोगे, तो तुम्हें दंड मिलेगा और तुम्हारा विनाश हो जाएगा।”

मूसा ने लोगों को यह भी बताया कि परमेश्वर की व्यवस्थाएं न्यायसंगत और सही हैं। उसने कहा, “परमेश्वर की आज्ञाएं तुम्हारे लिए जीवन का मार्ग हैं। उन्हें मानकर तुम बुद्धिमान और समझदार बनोगे। अन्य राष्ट्र तुम्हें देखकर कहेंगे कि यह महान लोग कितने बुद्धिमान और समझदार हैं, क्योंकि उनका परमेश्वर उनके निकट है और उनकी सुनता है।”

मूसा ने लोगों को यह भी याद दिलाया कि परमेश्वर ने उनके पूर्वजों से वादा किया था कि वह उनके वंश को एक महान राष्ट्र बनाएगा। उसने कहा, “परमेश्वर ने अब्राहम, इसहाक और याकूब से वादा किया था कि वह उनके वंश को आशीर्वाद देगा। और अब, वह वादा पूरा कर रहा है। तुम्हें केवल उसकी आज्ञाओं का पालन करना है और उसके मार्ग पर चलना है।”

अंत में, मूसा ने लोगों से कहा, “आज मैं तुम्हें आकाश और पृथ्वी को गवाह बनाकर कहता हूँ कि तुम्हारे सामने जीवन और मृत्यु, आशीर्वाद और श्राप रखे गए हैं। इसलिए, जीवन को चुनो, ताकि तुम और तुम्हारे वंशज जीवित रह सको। परमेश्वर से प्रेम करो, उसकी आवाज सुनो और उसके साथ चिपके रहो, क्योंकि वही तुम्हारा जीवन है।”

इस प्रकार, मूसा ने इस्राएल के लोगों को परमेश्वर की व्यवस्थाओं और आज्ञाओं का महत्व समझाया। उसने उन्हें याद दिलाया कि परमेश्वर उनके साथ है और वह उन्हें आशीर्वाद देगा, यदि वे उसके मार्ग पर चलेंगे। लोगों ने मूसा की बातों को गंभीरता से सुना और परमेश्वर की आज्ञाओं को मानने का संकल्प लिया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना हमारे लिए जीवन का मार्ग है। उसके वचनों को मानकर हम बुद्धिमान और आशीषित बन सकते हैं। परमेश्वर हमारे साथ है, और वह हमें हमेशा मार्गदर्शन देता है। हमें केवल उसकी आवाज सुननी है और उसके साथ चलना है।

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