1 कुरिन्थियों 2 के आधार पर एक विस्तृत और गहन कहानी:
एक समय की बात है, जब प्रेरित पौलुस कुरिन्थुस की कलीसिया को एक पत्र लिख रहे थे। वह शहर ग्रीस में स्थित था, जहाँ बुद्धिमानी और दर्शन का बहुत महत्व था। लोग ज्ञान और तर्क के माध्यम से सत्य को खोजने की कोशिश करते थे। परन्तु पौलुस जानते थे कि परमेश्वर का ज्ञान मनुष्य की बुद्धि से ऊपर है। उन्होंने अपने पत्र में इस बात को स्पष्ट करने का निश्चय किया।
पौलुस ने लिखना शुरू किया, “हे भाइयों और बहनों, जब मैं तुम्हारे पास आया, तो मैंने परमेश्वर के रहस्य को बताने के लिए उच्च शब्दों या मनुष्य की बुद्धिमत्ता का उपयोग नहीं किया। मैंने यीशु मसीह और उसके क्रूस पर चढ़ने के सिवाय कुछ भी नहीं सिखाया। मैं कमजोरी, भय और कांपते हुए तुम्हारे बीच में रहा। मेरी बातें और मेरा प्रचार मनुष्य की बुद्धिमत्ता के आकर्षक शब्दों पर नहीं, बल्कि आत्मा की सामर्थ्य पर आधारित था।”
पौलुस ने समझाया कि मनुष्य की बुद्धि परमेश्वर के रहस्यों को नहीं समझ सकती। वह कहते हैं, “हम परमेश्वर की बुद्धि की बात करते हैं, जो गुप्त और छिपी हुई है। यह वह बुद्धि है जिसे परमेश्वर ने सृष्टि की रचना से पहले हमारे लिए तैयार किया था। यदि इस संसार के शासकों ने इस बुद्धि को जाना होता, तो उन्होंने महिमा के प्रभु को क्रूस पर नहीं चढ़ाया होता।”
फिर पौलुस ने एक गहरी सच्चाई को उजागर किया। उन्होंने लिखा, “जैसा लिखा है, ‘जो आंखों ने नहीं देखा, कानों ने नहीं सुना, और जो मनुष्य के मन में नहीं आया, वह सब परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिए तैयार किया है।’ परन्तु परमेश्वर ने इन बातों को हम पर आत्मा के द्वारा प्रकट किया है। क्योंकि आत्मा सब बातों को, यहाँ तक कि परमेश्वर की गहरी बातों को भी जाँचता है।”
पौलुस ने आगे समझाया कि मनुष्य का आत्मिक ज्ञान उसकी स्वाभाविक बुद्धि से अलग है। वह कहते हैं, “मनुष्य का स्वाभाविक मन परमेश्वर की आत्मिक बातों को नहीं समझ सकता, क्योंकि वे उसके लिए मूर्खता की बातें हैं। वह उन्हें नहीं जान सकता, क्योंकि उन्हें आत्मिक रूप से समझा जाता है। परन्तु आत्मिक मनुष्य सब बातों को जाँचता है, और उस पर किसी का न्याय नहीं होता।”
पौलुस ने यह भी बताया कि मसीह का मन हमें दिया गया है, ताकि हम परमेश्वर की उन बातों को समझ सकें जो हमें उसकी कृपा से दी गई हैं। वह कहते हैं, “हम ने संसार की आत्मा को नहीं, परन्तु वह आत्मा पाया है जो परमेश्वर की ओर से है, ताकि हम उन बातों को जान सकें जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। हम इन बातों को उन शब्दों में बताते हैं जो आत्मा सिखाता है, न कि मनुष्य की बुद्धि के शब्दों में।”
अंत में, पौलुस ने कुरिन्थुस के विश्वासियों को याद दिलाया कि आत्मिक ज्ञान केवल परमेश्वर की आत्मा के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है। वह कहते हैं, “जो मनुष्य स्वाभाविक है, वह परमेश्वर की आत्मिक बातों को ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उसके लिए मूर्खता हैं। वह उन्हें नहीं समझ सकता, क्योंकि उन्हें आत्मिक रूप से समझा जाता है। परन्तु जो आत्मिक है, वह सब बातों को जाँचता है, और उस पर किसी का न्याय नहीं होता। क्योंकि ‘किसने प्रभु का मन जाना, कि उसे सिखाए?’ परन्तु हमारे पास मसीह का मन है।”
इस प्रकार, पौलुस ने कुरिन्थुस की कलीसिया को यह सिखाया कि परमेश्वर का ज्ञान मनुष्य की बुद्धि से ऊपर है, और यह केवल उसकी आत्मा के द्वारा ही प्रकट किया जा सकता है। उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि मसीह का क्रूस मनुष्य की बुद्धि के लिए मूर्खता प्रतीत हो सकता है, परन्तु यह परमेश्वर की सामर्थ्य और बुद्धि का प्रतीक है। और यही सच्चाई हमें उद्धार और अनन्त जीवन की ओर ले जाती है।