पवित्र बाइबल

यहोब की नम्रता और परमेश्वर की महिमा

यहोब 42 की कहानी हमें परमेश्वर की महिमा और उसकी सर्वशक्तिमानता के साथ-साथ मनुष्य की नम्रता और विश्वास की गहराई को दर्शाती है। यह कहानी यहोब के जीवन के अंतिम अध्याय को चित्रित करती है, जहाँ वह अपने संघर्षों और परीक्षाओं के बाद परमेश्वर के सामने पूरी तरह से समर्पित हो जाता है। आइए, इस कहानी को विस्तार से जानें।

यहोब ने अपने जीवन में अत्यधिक कष्ट झेले थे। उसकी संपत्ति, उसके बच्चे, और उसका स्वास्थ्य सब कुछ उससे छिन गया था। उसके मित्रों ने उसे दोषी ठहराने की कोशिश की, और यहाँ तक कि उसकी पत्नी ने भी उसे परमेश्वर को त्यागने के लिए कहा। परंतु यहोब ने अपने विश्वास को नहीं छोड़ा। वह परमेश्वर से प्रश्न करता रहा, उसके न्याय और उसकी योजना को समझने की कोशिश करता रहा। अंत में, परमेश्वर ने यहोब से बात की और उसे अपनी सृष्टि की महिमा और अपनी सर्वशक्तिमानता का एहसास कराया।

जब परमेश्वर ने यहोब से बात की, तो उसने उसे पृथ्वी और आकाश की रचना, समुद्र की गहराई, और जंगली जानवरों की शक्ति के बारे में बताया। परमेश्वर ने यहोब से पूछा, “क्या तू उन बातों को समझ सकता है जो मैंने बनाई हैं? क्या तू उनकी रक्षा कर सकता है या उन्हें संभाल सकता है?” यहोब ने महसूस किया कि वह परमेश्वर की महिमा और उसकी योजना को पूरी तरह से नहीं समझ सकता। उसने अपनी सीमाओं को स्वीकार किया और परमेश्वर के सामने नम्र हो गया।

यहोब ने परमेश्वर से कहा, “मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी योजना को कोई रोक नहीं सकता। मैंने जो बातें नहीं समझी थीं, उनके बारे में बातें कीं, जो मेरी समझ से परे थीं। मैंने तेरे बारे में सुना था, पर अब मैंने तुझे अपनी आँखों से देखा है। इसलिए मैं अपने आप से घृणा करता हूँ और धूल और राख में पश्चाताप करता हूँ।”

यहोब का यह पश्चाताप उसकी गहरी नम्रता और परमेश्वर के प्रति उसके विश्वास को दर्शाता है। वह जान गया कि परमेश्वर की योजना उसकी समझ से बहुत ऊपर है, और उसने अपने आप को पूरी तरह से परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया।

परमेश्वर ने यहोब की नम्रता और विश्वास को देखा और उसे आशीष दी। उसने यहोब के मित्रों से कहा कि वे यहोब के लिए बलिदान चढ़ाएँ और उसके लिए प्रार्थना करें। परमेश्वर ने यहोब को उसके कष्टों से भी अधिक आशीष दी। उसने यहोब की संपत्ति को दोगुना कर दिया, उसे सात बेटे और तीन बेटियाँ दीं, और उसे लंबी आयु प्रदान की। यहोब की बेटियाँ सुंदर और बुद्धिमान थीं, और उन्हें उनके भाइयों के साथ समान रूप से विरासत में हिस्सा मिला।

यहोब ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में शांति और समृद्धि का आनंद लिया। वह अपने परिवार और मित्रों के साथ खुशी से रहा, और उसने परमेश्वर की महिमा का गुणगान किया। यहोब की कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर की योजना हमेशा हमारी समझ से ऊपर होती है, और हमें उस पर पूरा विश्वास रखना चाहिए। चाहे हम कितने भी कष्टों से गुजरें, परमेश्वर हमें आशीष देने के लिए तैयार है, बशर्ते हम उसके प्रति वफादार और नम्र बने रहें।

यहोब की कहानी का अंत हमें यह संदेश देता है कि परमेश्वर की महिमा और उसकी दया हमेशा हमारे जीवन में प्रकट होती है, और हमें उसके प्रेम और न्याय पर भरोसा करना चाहिए।

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