परमेश्वर और अय्यूब: बेहेमोथ का दर्शन
हवा अब भी गर्म और भारी थी, पर उस तूफ़ान की चीख-पुक कुछ कम हो आई थी। अय्यूब अपने टाट पर बैठा, उसकी आँखें अब भी उस विशाल, अनंत आकाश की ओर टिकी थीं, जहाँ से वह आवाज़ उतरी थी।…
विदेशी विवाह और एज्रा का विलाप
जेरुशलम की दोपहरी धूल भरी और सूनी थी। एज्रा, शास्त्रियों का शास्त्री, अपने कमरे की खिड़की पर खड़ा हुआ सोच रहा था। बाहर, शहर की दीवारें अभी भी पुराने जख्मों की तरह दिख रही थीं, चिनाई के नए पत्थर पुराने…
अबीजा की विश्वास विजय
शुरुआत उस समय की है जब यहूदा के राजा अबीजा ने शासन संभाला। वह रहबोआम का पुत्र और सुलैमान का पोता था। राज्य अभी बंटा हुआ था—यहूदा और बिन्यामीन के गोत्र उसके साथ थे, जबकि दस गोत्र यरोबाम के नेतृत्व…
गिलबोआ पर राजा शाऊल का अंत
गिलबोआ के उन निर्जन पहाड़ों पर सांझ की हवा ने एक अजीब सी सनसनी फैला रखी थी। ऐसा लग रहा था जैसे पहाड़ियाँ खुद ही दुख की एक भारी चुप्पी ओढ़े हुए थीं। दिन भर से युद्ध की गड़गड़ाहट धीरे-धीरे…
तीन राजाओं की विजय और एक पिता का बलिदान
यह वह समय था जब यहोराम इस्राएल के राजगद्दी पर बैठा। वह अहाब का पुत्र था, किंतु उसने बाल की मूर्तियों को हटा दिया था, हालाँकि वह नबाट के पुत्र यारोबाम के पापों से पूरी तरह दूर नहीं हुआ था।…
भविष्य का राजा: दाऊद का अभिषेक
शमूएल बूढ़े हो रहे थे। उनकी आँखों की रोशनी धुंधली पड़ती जा रही थी, पर दिल की नज़र अब भी तेज़ थी। वह रामा में अपने घर में बैठे यह सोच रहे थे कि शाऊल के पतन की ख़बर सुनकर…
सत्ता की प्यास और प्रतिशोध
शेखेम के फाटकों पर दोपहर की धूप तेज थी। पत्थरों से झिलमिलाती गर्मी हवा में तैर रही थी। नगर के बुजुर्ग, जिनके चेहरों पर सालों के फैसलों की झुर्रियाँ थीं, चबूतरे पर इकट्ठा हुए। उनके सामने खड़ा था अबीमलेक, गिदोन…
मूसा के बाद यहोशू: एक नया नेतृत्व
मोआब के उन विस्तृत मैदानों में हवा तीखी चल रही थी, ठंडी और कुछ कसैलेपन लिए हुए। जैसे वह मृत्यु और एक नई शुरुआत, दोनों का स्वाद लिए जा रही हो। यहोशू खड़ा था, उसकी पीठ पहाड़ियों की ओर थी…
यादों के मैदान में ओग का युद्ध
(यह कथा एक वृद्ध सैनिक के स्मरणों के रूप में है, जो मोआब के मैदानों में विश्राम करते हुए अतीत को याद करता है।) हवा में नमक और धूल की हल्की-सी गंध थी। यर्दन नदी के उस पार की पहाड़ियाँ…
बारह सरदारों की एकस्वर भेंट
अग्निहोत्र की वेदी के अभिषेक के दिन, जब उस पर पहली बार घी और लहू की सुगंध उठी थी, तब मूसा ने महाकुटुम्ब के सरदारों को बुलाया। वे बारहों गोत्रों के प्रमुख, चेहरों पर एक गहरी, श्रद्धापूर्ण चिंता लिए हुए…









