biblesstories

शमौन का दिव्य सपना

शहर के बाहरी इरादे में, जहाँ मिट्टी के रास्ते खेतों में मिल जाते थे, शमौन नाम का एक बढ़ई रहता था। उसके हाथों पर गोंद और लकड़ी की बारीक रेखाएँ थीं, और आँखों में एक ऐसी थकान थी जो नींद…

सत्य की मशाल

एक था किसान, नाम था उसका श्रीधर। वह गाँव के बाहर, एक टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी के अंत में बसे अपने खेत के छोटे से घर में रहता था। उसके दो पुत्र थे। बड़ा, ध्रुव, शांत और विचारशील था। छोटा, तेजस, उत्साह…

अँधेरे में आस्था की आवाज़

वो रात यरूशलेम के पुराने शहर की दीवारों पर एक अजीब सन्नाटा लिए हुए थी। हवा में नमक और जैतून की गंध थी, लेकिन उसके साथ एक और चीज़ मिली हुई थी—डर की गंध। असाफ़ अपनी छोटी सी कोठरी की…

ईश्वर का दीया और अय्यूब की स्मृति

(यह कहानी अय्यूब के शब्दों में, उसकी स्मृतियों के आधार पर रची गई है।) बात पुरानी है। बहुत पुरानी। उन दिनों में जब ईश्वर का दीया मेरे सिर पर जलता था। जब उनकी मित्रता मेरी झोंपड़ी पर छाई रहती थी।…

एस्तेर का राज और हामान का अंत

(यह कहानी एस्तेर की पुस्तक के सातवें अध्याय पर आधारित है। सभी पात्र और घटनाएँ बाइबिल के अनुरूप हैं, किन्तु उनके भावों, वातावरण और संवादों को विस्तार से चित्रित किया गया है।) शाही भोजन-कक्ष में हवा तैलीय और भारी लग…

अबीय्याह की मृत्यु और यरबाम का पतन

शीलो के टीले पर सन्नाटा पसरा था। ऊँचे स्थानों पर यरबाम ने जो सुनहरे बछड़े स्थापित किए थे, उनकी छाया लंबी होती जा रही थी। हवा में बबूल के फूलों की मीठी-कड़वी गंध थी, पर उसमें एक अजीब सी गंधिल…

पौलुस का पत्र तीमुथियुस का साहस

एफेसुस की गलियाँ शाम की धुंध में डूबी हुई थीं, और तीमुथियुस की कोठरी की खिड़की से आती ठंडी हवा ने दीपक की लौ को झिंझोड़ दिया। कागज का एक पत्र, जो अब मुड़ा हुआ और किनारों से फटा हुआ…

शाश्वत शब्द का मानव रूप

शुरुआत थी एक शब्द की। पर यह कोई साधारण शब्द नहीं था। यह वह शब्द था जो हर शब्द से पहले मौजूद था, जो स्वयं ध्वनि और अर्थ का स्रोत था। उसकी उपस्थिति ही सब कुछ थी, और सब कुछ…

स्वनिर्मित बैल का पतन

वह साल था जब गर्मियाँ अपनी पूरी निर्ममता के साथ धरती पर पसर गई थीं। समरा का गाँव, जो हमेशा हरा-भरा और जीवंत रहता था, अब एक धूलभरी, उदास जगह बनकर रह गया था। कुएँ सूख चुके थे, खेतों में…

प्रेमगीत: श्लोमित और सुलेमान

वह दिन ढल रहा था, और बाग़ की हवा में ख़ुमार सा छाया हुआ था। श्लोमित अपनी छोटी सी कुटिया के द्वार पर बैठी, उंगलियों से जैतून के पेड़ की एक टहनी को सहलाते हुए, उसने आने वाले कदमों की…