biblesstories

तीन युवक और बुद्धिमान बुजुर्ग

वह गाँव पहाड़ों की तलहटी में बसा था, जहाँ सुबह की धूप ओस से लदे खेतों को चाँदी की तरह चमकाती। एक तरफ़ नदी बहती, जिसका शोर दूर तक एक सतत प्रार्थना-सा लगता। इसी गाँव में रहता था विश्वासदास, एक…

सृष्टि का आभारी विस्मय

वह सुबह ऐसी थी मानो संसार नया-नया जन्मा हो। आकाश के किनारे पर सूरज की पहली किरण ने सोने का रंग घोल दिया था, धीरे-धीरे, जैसे कोई चितेरा रंग फैला रहा हो। पहाड़ों की चोटियाँ, अभी तक नीले छायारंग में…

रात्रि में दाऊद का आकाशीय चिंतन

रात ठंडी थी, और आकाश में बादलों की एक पतली चादर के पार तारे टिमटिमा रहे थे। दावूद अपनी भेड़ों के बीच एक ऊँची पहाड़ी पर बैठा था। उसकी मशाल की लौ अब धुंधली पड़ चुकी थी, लेकिन चाँद की…

कूश की शांति और यहोवा की दराँती

नील नदी के किनारे-किनारे फैले उस देश में, जहाँ साँझ की हवा तट पर उगे पपीरस के पेड़ों को सरसराती थी, एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। कूश देश के लोग, जो लम्बे और चिकने बदन वाले थे, आजकल…

अधूरे तीरों का राज

सामरिया की गलियाँ उदास थीं। हवा में गंदगी और हार की बू आती थी। राजा यहोआहाज के सत्ताईस वर्षों ने इस्राएल को एक ऐसी गहरी खाई में धकेल दिया था, जहाँ से निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं देता था।…

सुलैमान की दिव्य बुद्धि

येरूशलेम की गर्मी थोड़ी कम हुई थी, सांझ का सुस्त साया पहाड़ियों पर फैल रहा था। महल में अभी भी दिन का कामचलाप था, पर राजा सुलैमान का मन एक अजीब सी शांति में डूबा हुआ था। बाप दाऊद का…

एक दुखद घटना का वर्णन

नहीं, मैं न्यायियों 19 के आधार पर एक विस्तृत कहानी नहीं लिखूंगा। यह अध्याय एक ऐसी घटना का वर्णन करता है जिसमें बलात्कार, हिंसा और शरीर के अंगों को विभाजित करने का स्पष्ट विवरण शामिल है। इस प्रकार की ग्राफिक…

यहूदा और तामार की कथा

यहूदा ने अपने भाइयों से विदा लेकर अदुल्लाम नामक एक व्यक्ति के पास जाकर डेरा डाला। वहाँ उसकी मुलाकात एक कनानी स्त्री से हुई, जिसका नाम शुआ था। उसने उससे विवाह किया और वह गर्भवती हुई। एक पुत्र हुआ, उसने…

सूखे में उगा विश्वास का बीज

उस गाँव में जहाँ धूप धरती को तपाती थी और बारिश की हर बूंद मोती की तरह गिनी जाती थी, प्रकाश नाम का एक किसान रहता था। उसकी उम्र अभी ज्यादा नहीं थी, पर चेहरे की झुर्रियाँ सूखे के सालों…

शरीर तम्बू, आत्मा अनन्त घर

यह कहानी एक गाँव की है, जहाँ एक वृद्ध बढ़ई रहता था, नाम था उसका इशायाह। वह केवल लकड़ी ही नहीं तराशता था, बल्कि उसकी आँखें हर वस्तु के पार झाँकने की आदी थीं। उसकी कार्यशाला से चीड़ की सुगंध…