पवित्र बाइबल

सत्ता की प्यास और प्रतिशोध

शेखेम के फाटकों पर दोपहर की धूप तेज थी। पत्थरों से झिलमिलाती गर्मी हवा में तैर रही थी। नगर के बुजुर्ग, जिनके चेहरों पर सालों के फैसलों की झुर्रियाँ थीं, चबूतरे पर इकट्ठा हुए। उनके सामने खड़ा था अबीमलेक, गिदोन…

मूसा के बाद यहोशू: एक नया नेतृत्व

मोआब के उन विस्तृत मैदानों में हवा तीखी चल रही थी, ठंडी और कुछ कसैलेपन लिए हुए। जैसे वह मृत्यु और एक नई शुरुआत, दोनों का स्वाद लिए जा रही हो। यहोशू खड़ा था, उसकी पीठ पहाड़ियों की ओर थी…

यादों के मैदान में ओग का युद्ध

(यह कथा एक वृद्ध सैनिक के स्मरणों के रूप में है, जो मोआब के मैदानों में विश्राम करते हुए अतीत को याद करता है।) हवा में नमक और धूल की हल्की-सी गंध थी। यर्दन नदी के उस पार की पहाड़ियाँ…

बारह सरदारों की एकस्वर भेंट

अग्निहोत्र की वेदी के अभिषेक के दिन, जब उस पर पहली बार घी और लहू की सुगंध उठी थी, तब मूसा ने महाकुटुम्ब के सरदारों को बुलाया। वे बारहों गोत्रों के प्रमुख, चेहरों पर एक गहरी, श्रद्धापूर्ण चिंता लिए हुए…

स्वप्न सीढ़ी और याकूब

भूमि बेरस थी। रेत और कंकड़ के बीच से झाड़ियाँ कंटीली और धूसर निकल रही थीं, मानो धूप ने उनका सारा रस सोख लिया हो। याकूब के पैरों के नीचे मिट्टी चटखती थी। हर कदम पर एक धूल भरी गर्म…

आत्मा का विश्राम

वह दोपहर ठंडी थी, हालाँकि धूप खिली हुई थी। गाँव की वह पुरानी चाय की दुकान, जिसके बाहर नीम का पेड़ अपनी शाखाएँ फैलाए खड़ा था, आज भी उसी तरह सुस्ताहट से भरी हुई लग रही थी। रामस्वरूप, जो गाँव…

पवित्र नदी का जीवनदायी प्रवाह

यह सब एक खामोशी में शुरू हुआ। मंदिर के पिछवाड़े की ओर जाने वाले एक छोटे से दरवाजे से यहेजकेल को बाहर लाया गया था। हवा स्थिर थी, और सूरज पत्थर के फर्श पर सफेद और कठोर पड़ रहा था।…

अंगूर की लकड़ी और येरूशलेम की आग

येरूशलेम की उन गर्मियों में हवा भी जैसे सीसा लिए घूमती थी। एक ऐसी गर्मी, जो केवल त्वचा को ही नहीं, आत्मा को भी झुलसा देती थी। नगर के पूर्वी किनारे पर, किद्रोन घाटी के किनारे बने एक छोटे से…

बंधन से मुक्ति: यिर्मयाह की पसंद

(यह कहानी यिर्मयाह 40 के आधार पर मूल रचना है।) उस सुबह की हवा में जलने की गंध समाई हुई थी। यिर्मयाह अपनी जंजीरों की झनकार से जगा, पर आज वह आवाज़ नहीं थी। कुंडी खुलने की खड़खड़ाहट हुई, और…

टूटे हृदय का सच

शिलोह के खंडहरों पर शाम ढल रही थी। हवा में धूल और उदासी का स्वाद था। एलियाकीम, जो अब अपने नाम के अर्थ ‘परमेश्वर उठाएगा’ पर कोई विश्वास नहीं रखता था, एक टूटी हुई दीवार के सहारे बैठा, आँखें बंद…