स्वप्न सीढ़ी और याकूब
भूमि बेरस थी। रेत और कंकड़ के बीच से झाड़ियाँ कंटीली और धूसर निकल रही थीं, मानो धूप ने उनका सारा रस सोख लिया हो। याकूब के पैरों के नीचे मिट्टी चटखती थी। हर कदम पर एक धूल भरी गर्म…
आत्मा का विश्राम
वह दोपहर ठंडी थी, हालाँकि धूप खिली हुई थी। गाँव की वह पुरानी चाय की दुकान, जिसके बाहर नीम का पेड़ अपनी शाखाएँ फैलाए खड़ा था, आज भी उसी तरह सुस्ताहट से भरी हुई लग रही थी। रामस्वरूप, जो गाँव…
पवित्र नदी का जीवनदायी प्रवाह
यह सब एक खामोशी में शुरू हुआ। मंदिर के पिछवाड़े की ओर जाने वाले एक छोटे से दरवाजे से यहेजकेल को बाहर लाया गया था। हवा स्थिर थी, और सूरज पत्थर के फर्श पर सफेद और कठोर पड़ रहा था।…
अंगूर की लकड़ी और येरूशलेम की आग
येरूशलेम की उन गर्मियों में हवा भी जैसे सीसा लिए घूमती थी। एक ऐसी गर्मी, जो केवल त्वचा को ही नहीं, आत्मा को भी झुलसा देती थी। नगर के पूर्वी किनारे पर, किद्रोन घाटी के किनारे बने एक छोटे से…
बंधन से मुक्ति: यिर्मयाह की पसंद
(यह कहानी यिर्मयाह 40 के आधार पर मूल रचना है।) उस सुबह की हवा में जलने की गंध समाई हुई थी। यिर्मयाह अपनी जंजीरों की झनकार से जगा, पर आज वह आवाज़ नहीं थी। कुंडी खुलने की खड़खड़ाहट हुई, और…
टूटे हृदय का सच
शिलोह के खंडहरों पर शाम ढल रही थी। हवा में धूल और उदासी का स्वाद था। एलियाकीम, जो अब अपने नाम के अर्थ ‘परमेश्वर उठाएगा’ पर कोई विश्वास नहीं रखता था, एक टूटी हुई दीवार के सहारे बैठा, आँखें बंद…
शमौन का दिव्य सपना
शहर के बाहरी इरादे में, जहाँ मिट्टी के रास्ते खेतों में मिल जाते थे, शमौन नाम का एक बढ़ई रहता था। उसके हाथों पर गोंद और लकड़ी की बारीक रेखाएँ थीं, और आँखों में एक ऐसी थकान थी जो नींद…
सत्य की मशाल
एक था किसान, नाम था उसका श्रीधर। वह गाँव के बाहर, एक टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी के अंत में बसे अपने खेत के छोटे से घर में रहता था। उसके दो पुत्र थे। बड़ा, ध्रुव, शांत और विचारशील था। छोटा, तेजस, उत्साह…
अँधेरे में आस्था की आवाज़
वो रात यरूशलेम के पुराने शहर की दीवारों पर एक अजीब सन्नाटा लिए हुए थी। हवा में नमक और जैतून की गंध थी, लेकिन उसके साथ एक और चीज़ मिली हुई थी—डर की गंध। असाफ़ अपनी छोटी सी कोठरी की…
ईश्वर का दीया और अय्यूब की स्मृति
(यह कहानी अय्यूब के शब्दों में, उसकी स्मृतियों के आधार पर रची गई है।) बात पुरानी है। बहुत पुरानी। उन दिनों में जब ईश्वर का दीया मेरे सिर पर जलता था। जब उनकी मित्रता मेरी झोंपड़ी पर छाई रहती थी।…



















