परमेश्वर की नींव पर घर
वह दिन अभी तक याद है जिद्दू को। सुबह के चार बजे थे, और ठंडी हवा खिड़की के शीशे पर पानी की बूंदें छोड़ रही थी। उसकी आँखें जलती हुईं थीं, और मेज पर बिखरे हुए कागज़ उसकी कोशिशों के…
हृदय का भजन
वह सुबह ठंडी थी, पहाड़ियों की चोटियों पर हल्का सा धुंधला पन छाया हुआ था। बूढ़ा एलिय्याह अपनी झोंपड़ी के सामने बैठा, एक टूटी हुई चटाई पर, और उसकी आँखें उस विस्तृत घाटी को निहार रही थीं जो उसके सामने…
मरुभूमि में आत्मा की प्यास
यह बात उस समय की है जब मैं यरूशलेम से दूर, पूरब के उन सूखे इलाकों में भटक रहा था। वह कोई रेगिस्तान नहीं था, बल्कि एक ऐसा स्थान था जहाँ धरती फटी हुई थी, और आकाश तपता हुआ सीसा…
अय्यूब की रात: ईश्वर के सामने प्रश्न
उस रात नींद टूटी तो फिर आई ही नहीं। कहाँ आती, जब शरीर के हर जोड़ में दर्द धँसा हुआ था, और मन उससे कहीं ज्यादा टूटा हुआ था। मैंने अपने खाट के पास पड़े एक टुकड़े खजूर की लकड़ी…
विश्वास की विजय: राजा आसा
यहूदा के पहाड़ी इलाके में दोपहर की गर्मी स्थिर थी, ऐसी लग रही थी जैसे हवा ने भी साँस लेना छोड़ दिया हो। यरूशलेम की पथरीली गलियों से उठती धूल, राजमहल के ऊँचे बुर्ज पर बैठे आसा के चेहरे पर…




