महीना: मार्च 2026

पहली फसल का स्मरण और समर्पण

धूप इतनी तेज थी कि हवा भी थककर पहाड़ों के पीछे सो गई लगती थी। एलियाकिम की पीठ पर पसीने की धार बह रही थी, पर उसका हाथ जो जमीन पर था, वह कोमल था। उसकी उँगलियाँ उस गेहूँ की…

वाचा और पिता की छाया

धूप चट्टानों पर पिघलती हुई सी प्रतीत हो रही थी। शफात्याह अपने पिता के तम्बू के सामने बैठा, उँगलियों से रेत में कुछ अनिश्चित आकृतियाँ बना रहा था। उसके मन में एक तूफान था, और वह तूफान उसकी अपनी ही…

विश्राम और विमोचन का वर्ष

एक गर्म दोपहर थी जब एलिय्याह ने अपने जैतून के बाग की मिट्टी को उंगलियों के बीच रगड़ा। वह खुरदरी थी, थोड़ी सूखी। उसने आसपास के खेतों को देखा जहां गेहूं की बालियां सुनहरी होने लगी थीं, लेकिन उसका अपना…

शिप्रा-पुवा का साहस और इज़राइलियों का संघर्ष

यह वह दिन था जब नील का पानी सूरज की रोशनी में तांबे की तरह चमक रहा था। मिस्र की धरती पर हवा में रेत के महीन कण तैर रहे थे, और गीज़े के पिरामिड पुराने संस्मरणों की तरह खड़े…

सदोम का विनाश और लूत का उद्धार

सूरज ढल चुका था, और सदोम की हवा में एक अजीब-सी गर्मजोशी और बेचैनी मिली-जुली थी। शहर के फाटक पर बैठे लूत ने दो पदचिन्ह धूल में उभरते देखे। यात्री थे, लंबे, गम्भीर चेहरे, साधारण यात्रियों जैसे वस्त्र, पर उनकी…

अंधेरे में प्रकाश की खोज

वह शाम ठंडी थी, और हवा में सर्दी की एक झलक महसूस हो रही थी। अमर कुर्सी पर बैठा, खिड़की से बाहर देख रहा था जहाँ अँधेरा धीरे-धीरे पेड़ों को निगल रहा था। कमरे में केवल एक दीये की लौ…

पौलुस की अंतिम विरासत

रोम की उस अंधेरी कोठरी में हवा ठंडी और गीली थी, जैसे दीवारों से हमेशा के लिए सिमट गई हो। पौलुस ने एक लम्बी सांस ली। उसकी सांस का धुआं मद्धिम चिराग की लौ के सामने ठहरा रहा। उसकी कलाई…

आत्मा की अगुवाई में आज़ादी

मोहन अपनी झोपड़ी की देहरी पर बैठा, सूरज ढलने का इंतज़ार कर रहा था। दिनभर की गर्मी की मार से पूरा गाँव थक गया था, और उसका अपना मन भी एक अजीब सी जकड़न से भरा हुआ था। वह आज़ाद…

बुद्धि से परे प्रेम

कोरिन्थ का बंदरगाह दोपहर की धूप में चमक रहा था। हवा में नमक और जहाजों के रस्सों की गंध, तेल और दूर कहीं सड़ते हुए फलों की मीठी-सड़ी महक मिली हुई थी। दमास्कस का लिनन बेचने वाला एक व्यापारी, लूकियस,…

लूस्त्रा में चमत्कार और पत्थरवाह

उस धूल भरे रास्ते पर, जहाँ जैतून के पेड़ों की छाया लगभग खत्म हो रही थी और खुले मैदान की गर्मी शुरू होती थी, दो आदमी चले जा रहे थे। पौलुस की चाल में एक तेजस्वी थकान थी, मानो उसका…