पापी नगर की दिव्य चेतावनी
यरूशलेम की सड़कें उस गर्मी में तपती थीं, जैसे कोई अदृश्य आग नगर की नींव तक को भस्म करने पर तुली हो। हवा में धुआँ था, न कि युद्ध का, बल्कि मन्दिर से उठते हब्बे-हब्बे बलि-पशुओं के चमड़े के जलने…
दादा की सीख और प्रभु का दीपक
सुबह की धूप खिड़की से फिसलकर मिट्टी के फर्श पर एक सुनहरा चौखटा बना रही थी। रामलाल दादा अपनी चारपाई के किनारे बैठे, अपनी लकड़ी की छड़ी को हथेलियों के बीच धीरे-धीरे घुमा रहे थे। उनके पास बैठा उनका पोता,…
स्तुति का असली रहस्य
सूरज ढलने लगा था, और आकाश में केसरिया और बैंगनी रंग फैल रहे थे। नदी किनारे बैठा वह बूढ़ा, एलिय्याह, अपनी लकड़ी की सहारे वाली छड़ी को रेत में धीरे-धीरे घुमा रहा था। उसकी आँखों में एक दूर की चमक…
नदी किनारे की टूटी आत्मा
वह नदी के किनारे बैठा था, और पानी की धारा में उसका प्रतिबिंब टूट-टूट कर बह रहा था। हवा ठंडी थी, पर उसके मन की गर्मी से वह ठंड कहीं नहीं लग रही थी। दूर, उस पार के पहाड़ों पर…
एक टूटे मटके में विश्वास
वह दिन ढलने को था, और आकाश में लालिमा फैली हुई थी, जैसे कोई घाव धीरे-धीरे सूख रहा हो। हवा में धूल के कण तैर रहे थे, और गाँव के किनारे बने उस छोटे से झोपड़े में अंधेरा पहले ही…
दुष्ट का क्षणभंगुर आनंद
उस कस्बे में धूल ही धूल थी। रास्तों पर उड़ती हुई मिट्टी, दूर तक फैले सूखे आकाश के नीचे, ऐसा लगता था जैसे प्रभु ने रंगों का घड़ा ही उलट दिया हो। बस पीला और भूरा, और कहीं-कहीं किसी झरबेरी…
नहेम्याह: खाली शहर में नया जीवन
यरूशलेम की सुबह ठंडी और सूनी थी। हवा में अभी भी रात की नमी थी, और उजड़े हुए मकानों के खंडहरों पर ओस की बूँदें चमक रही थीं। नहेम्याह शहर की दीवार पर खड़ा था, उसकी नज़र उन चौड़ी, खाली…
दाऊद का मंदिर का सपना
यह उस समय की बात है जब दाऊद बूढ़ा हो चला था। वर्षों के युद्धों और भाग-दौड़ के बाद अब एक विचित्र सी शांति उसके राज्य में छाई हुई थी, मानो आकाश ने सांस ली हो। एक दिन, वह अपने…
राजाओं का उत्थान पतन
यरूशलेम के राजमहल में सुबह की ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी। उज्जिय्याह, जिसे आजकल लोग अजर्याह कहते थे, अपने सिंहासन पर बैठा हुआ था। बाहर शहर जाग रहा था, पर उसके मन में एक अजीब बेचैनी थी।…
सुलैमान का मंदिर निर्माण
यह वह समय था जब सुलैमान का राज्य दाऊद के दिनों की उस अशांति से बहुत दूर, एक गहरी शांति में डूबा हुआ था। चारों ओर विश्राम था। दिन बीतते थे और कोई युद्ध का डंका नहीं बजता था, न…









