पवित्र बाइबल

दानिय्येल का अंतिम दर्शन

बाबुल की गर्म हवाएँ अब भी उसी तरह चलती थीं, पर दानिय्येल के शरीर में अब वह ताप नहीं रहा। वह बूढ़ा हो चला था, हड्डियाँ काँटों-सी चुभतीं, आँखों के सामने धुंधलका सा छाया रहता। पर आत्मा… आत्मा अभी भी उस नदी के किनारे खड़े उस युवक जैसी थी, जिसने स्वप्न देखे थे। राजाओं के स्वप्न सुलझाए थे। उसने सिंहों की मुंहतोड़ जवाब दी थी। और अब… अब वह इन अंतिम दर्शनों के भार तले, एक गहरी, पवित्र थकान महसूस कर रहा था।

यह दर्शन उसे तिग्रिस नदी के किनारे मिला था। आकाश ने जैसे अपने सारे रहस्य एक साथ खोल दिए हों। दो पुरुष आए थे – एक इस पार नदी के किनारे, दूसरा उस पार। उनकी चमक ऐसी थी जैसे सूरज और चाँद दोनों एक साथ उग आए हों। और फिर एक और… जिसके वस्त्र सन के थे, देह पॉलिश किए हुए पीतल जैसी चमकदार। उसने आवाज़ दी थी, और आवाज़ ने नदी का जल, आकाश की नीली चादर, सब कुछ हिला दिया था।

“दानिय्येल,” उस आवाज़ ने कहा था, “अब तू शांत रह, क्योंकि ये बातें अंत के दिनों के लिए सील की गई हैं।”

पर आज, अपनी कोठरी की शांति में बैठा दानिय्येल उन शब्दों को दोहरा रहा था जो उस सने वस्त्रधारी ने कहे थे। “और उस समय तुम्हारी प्रजा का हर एक व्यक्ति, जिसका नाम पुस्तक में लिखा हुआ पाया जाएगा, उद्धार पाएगा।”

‘पुस्तक’। यह शब्द उसके मन में गूँजता रहा। कौन-सी पुस्तक? स्वर्ग की वह पुस्तक, जिसमें हर एक जीवित प्राणी का नाम लिखा है? या फिर कोई और? उसकी आँखें बंद थीं, पर मन की आँखों के सामने एक दृश्य उभर आया – अराजकता और विपत्ति का ऐसा दौर, जैसा पृथ्वी ने कभी न देखा हो। राष्ट्र राष्ट्र से भिड़ते, आकाश आग बरसाता, समुद्र अपनी सीमाएँ तोड़ देता। और फिर… मीकाएल, उनका महान योद्धा, खड़ा होता। वह खड़ा होता अपने लोगों के लिए। यह छवि दानिय्येल के लिए असीम सांत्वना थी। वह जानता था, उसका परमेश्वर मूक दर्शक नहीं है।

फिर उसने उन शब्दों पर ध्यान दिया जो उससे अधिक गूढ़ थे। “बहुत से लोग, जो भूमि की मिट्टी में सोए हुए हैं, जाग उठेंगे; कितने तो अनन्त जीवन के लिए, और कितने लोग अपनी नीचता और अनन्त भ्रष्टता के लिए।”

यह क्या था? मृत्यु की पराजय? कब्रों का फटना? दानिय्येल ने अपने लम्बे जीवन में अनेक मृत्यु देखी थी। नबूकदनेस्सर की विलासिता से भरी मृत्यु, बेलशस्सर की रक्तरंजित मृत्यु। पर यह… यह तो सबके लिए था। यह न्याय का वह अंतिम, अपरिहार्य क्षण था, जब हर गुप्त बात प्रकट होगी। वह उन धर्मी शिक्षकों के बारे में सोचने लगा, जिन्होंने परमेश्वर का मार्ग दिखाया था। वे तारों की भाँति चमकेंगे। एक सुंदर, दिव्य प्रतिफल। और वे जो दुष्टता में डटे रहे… उनकी भ्रष्टता हमेशा के लिए उजागर रहेगी। यह विचार भयावह था, पर न्यायपूर्ण भी।

तभी उसने वह प्रश्न पूछा था, जो उसकी जिज्ञासा से नहीं, बल्कि एक गहरी व्याकुलता से उपजा था। “हे मेरे प्रभु, इन बातों का अंत क्या होगा?”

उत्तर रहस्यमय आया था। “एक समय, दो समय, और आधा समय।” और फिर, “जब लोगों का बल टूट जाएगा, तब ये सब बातें पूरी होंगी।”

दानिय्येल ने अपना सिर हिलाया। वह समझ नहीं पाया। उसने फिर पूछा था, “हे मेरे प्रभु, इन बातों का अंत क्या होगा?”

इस बार उत्तर और भी स्पष्ट, पर और भी गुप्त था। “दानिय्येल, अब तू अपने मार्ग पर चला जा, क्योंकि ये बातें अंत के दिनों के लिए बन्द और मुहरबन्द की गई हैं। बहुत से लोग शुद्ध किए जाएँगे, और उजले किए जाएँगे, और खरे ठहराए जाएँगे; पर दुष्ट लोग दुष्टता करते रहेंगे, और कोई दुष्ट समझ न पाएगा, परन्तु समझने वाले लोग समझेंगे।”

यहीं समाप्त हुआ था दर्शन। पर दानिय्येल का मन नहीं माना। वह आज भी उन आखिरी शब्दों पर मनन कर रहा था। ‘समझने वाले लोग समझेंगे।’ यह आशा की किरण थी। यह उसके और हर उस व्यक्ति के लिए एक आदेश था, जिसके कान सुनने के लिए तैयार थे। रहस्य सुलझाने की कोशिश न करो, बल्कि विश्वास के साथ जीवन जियो। शुद्ध होने की प्रक्रिया में खरे उतरो।

उसने खिड़की से बाहर देखा। सूरज अस्त हो रहा था, आकाश में लाल और नारंगी के रंग फैल रहे थे। दिन का अंत। पर वह जानता था, हर सूर्यास्त के पीछे एक सूर्योदय छिपा है। उसने पुस्तकों के ढेर में से एक चर्मपत्र निकाला। उसने एक कलम उठाई। उसके हाथ काँप रहे थे, पर उसकी इच्छा दृढ़ थी। इन बातों को लिखना था। सील करना था। समय उन्हें खोलेगा।

उसने लिखना शुरू किया – “उस समय मीकाएल अधिकारी खड़ा होगा…” शब्द धीरे-धीरे पन्ने पर उतर रहे थे, जैसे किसी पवित्र नदी का प्रवाह। वह नहीं जानता था कि यह सब कब घटेगा। पर वह जानता था कि यह घटेगा ज़रूर। और यह जानना, इस बूढ़े नबी के लिए, एक खड़ी हुई दीवार की तरह था, जिस पर वह अपनी पीठ टिका कर, शांति से, प्रतीक्षा कर सकता था। अंत की घड़ी आएगी, पर उससे पहले, विश्वास, आशा, और प्रेम का काम जारी रहेगा। और जो समझने को तैयार हैं, वे समझ जाएँगे। यही उसका अंतिम सबक था। यही उसकी विरासत।

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