समुद्र का रास्ता देखते-देखते बूढ़ा एलियाब की आँखें थक गई थीं। पश्चिम में, जहाँ आकाश और पानी एक हो जाते थे, एक धुँधली-सी रेखा दिखाई देती, फिर गायब हो जाती। वह उस रेखा का इंतज़ार कर रहा था। टायर के जहाज़ों की। पर आज सातवाँ दिन था और समुद्र सूनापन लिए हुए था, बस लहरें ही लहरें थीं, जो पुराने बंदरगाह के पत्थरों से टकरा-टकरा कर चूर-चूर हो रही थीं।
उसके पास बैठा उसका पोता, मीका, एक टूटी हुई मूर्ति की नाक से खेल रहा था। “दादा, वो लोग कब आएँगे?”
एलियाब ने एक गहरी साँस भरी। हवा में अब नमक की गंध नहीं, बल्कि एक तीखी, जलने जैसी बू आ रही थी। “शायद अब कभी नहीं, बेटा।”
टायर सिर्फ एक शहर नहीं था; वह एक विश्वास था। समुद्र की पीठ पर बसा, देवताओं का चहेता, व्यापार की देवी। उसके जहाज़ दुनिया के छोर तक जाते थे—तरशीश की चाँदी, सिप्रस की ताँबे की ख़ानें, मिस्र का बारीक़ सन, यहाँ तक कि सुदूर द्वीपों के अजनबी लोगों के साथ भी उसका व्यापार था। उसका बंदरगाह सदा जहाज़ों के झुंड से भरा रहता, मस्तूल इतने कि सूरज भी झाँक नहीं पाता था। उसकी गलियों में हर भाषा की आवाज़ गूँजती थी, और उसके ख़ज़ाने इतने कि लोग कहते थे कि टायर के निवासी चाँदी को पत्थर समझकर ठोकर मारते थे।
पर एलियाब को याद आया, कैसे पिछले महीने एक अजीब सन्नाटा छा गया था। व्यापारी गुप्त बातचीत करते, चेहरे पर चिंता की रेखाएँ। किदोन के जहाज़ बिना माल लौट आए थे। फिर अचानक, समुद्र के रास्ते वह ख़बर आई, जिस पर कोई विश्वास नहीं करना चाहता था।
“अश्शूर?” मीका ने पूछा था, जब एलियाब ने पहली बार नाम सुनाया।
“नहीं, बेटा। उससे भी बड़ी एक शक्ति। बाबुल। उसने नीनवे को धूल चटा दी है। और अब… अब वह समुद्र की ओर देख रहा है।”
भविष्यद्वक्ता की बातें, जो सड़क के किनारे चिल्लाता था, अचानक सबकी चर्चा का विषय बन गईं। वह एक विदेशी था, यहूदा से आया हुआ, पर उसकी आवाज़ में एक ऐसा दर्द था जो सबको चुभता था। “टायर पर विलाप करो, समुद्र के रास्ते के व्यापारी! तुम्हारा दुर्ग धराशायी हो गया है… समुद्र ने कहा है: ‘मैं तो कभी विधवा नहीं हुई, न कभी बाँझ रही।’ पर अब ऐसा होगा।”
लोग उस पर हँसते थे। टायर? विलाप? यह शहर तो चट्टान की तरह अटल था। उसकी दीवारें समुद्र से भी ऊँची थीं। पर एलियाब की आत्मा काँप उठती थी। क्योंकि भविष्यद्वक्ता ने सिर्फ विनाश की बात नहीं की थी। उसने उस अहंकार की बात की थी, जो इतनी ऊँचाई पर चढ़ गया था कि अब गिरने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा था। उसने कहा था—‘तूने सब राजाओं के गौरव को अपवित्र किया है।’
और सचमुच, टायर ने किया था। उसका धन उसकी शक्ति बन गया था। उसने राजाओं को उधार दिया था, और फिर उनकी नीतियाँ तय की थीं। उसने देवताओं को सोने-चाँदी से ढक दिया था, पर उन देवताओं के नाम पर जो कुछ किया, वह सिर्फ अपने लिए किया। समुद्र उसकी गलदशा था, और दुनिया उसकी लूट।
फिर वह दिन आया।
पहले तो दूर, क्षितिज पर, धुएँ के बादल उठे। समुद्र की हवा के बजाय, जलती हुई लकड़ी और सड़न की गंध आने लगी। फिर दौड़ते हुए लोग, चेहरे पर मौत का भय लिए। “वे आ गए! बाबुल की सेना! उन्होंने भूमि वाले टायर को घेर लिया है!”
भूमि वाला टायर, शहर का वह हिस्सा जो मुख्य भूमि से जुड़ा था, वह पहला लक्ष्य था। एलियाब और बचे-खुचे लोग द्वीप वाले टायर की ओर भागे, यह सोचकर कि यहाँ समुद्र हमारी रक्षा करेगा। उन्होंने देखा, कैसे धुआँ आकाश को काला कर रहा था, और लपटें रात के समय भी दिन जैसा उजाला कर देती थीं।
और फिर शुरू हुई घेराबंदी। एक दिन, दस दिन, सौ दिन… समय की कोई सीमा नहीं रही। बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी। द्वीप के चारों ओर जहाज़ों का घेरा। अन्न का आना बंद हो गया। पानी दुर्गंधयुक्त हो गया। समृद्धि का प्रतीक यह शहर अब भूख और बीमारी की गुफा बन चुका था।
एलियाब मीका को अपने से चिपकाए, उस पुराने बंदरगाह पर बैठा रहता, जहाँ से वह व्यापारी जहाज़ों के आने का इंतज़ार करता था। पर अब कोई जहाज़ नहीं आता था। सिर्फ बाबुल के युद्धपोत, काले और भयानक, दूर से निगाह रखते थे।
“तरशीश के जहाज़,” एलियाब धीरे से बुदबुदाया, जैसे खुद से बात कर रहा हो, “वे तुम्हारे व्यापार में सहभागी थे। वे दूर देश से तुम्हारे लिए भारी धन लाते थे। अब वे भी चले गए। वे अपने देश भाग गए हैं, समुद्र के इस कोने से दहशत में। सोर के बिना, उनके लिए यह रास्ता अब विदेश है।”
एक सुबह, जब सूरज खूनी लाल रंग लिए उदय हुआ, आक्रमण हुआ। बाबुल की सेना ने समुद्र में एक पुल बनाया था, मलबे और पत्थरों से। वह पुल टूटता, फिर बनता, पर वे रुके नहीं। और फिर, उनके हाथों में चमकती तलवारें लिए, वे दीवारों पर चढ़ आए।
उस दिन का शोर एलियाब कभी नहीं भूल सकता था—लोहे की आवाज़, चीखें, और उस भयानक ध्वस्त होने की आवाज़ जब शहर का मुख्य द्वार टूटा। उसने मीका की आँखें बंद करवा लीं, उसे छाती से चिपकाए रखा। वह खुद भी नहीं देखना चाहता था।
जब सब शांत हुआ, तो टायर वह नहीं रहा जो वह था। उसकी गलियाँ राख और रक्त से भरी थीं। उसके महलों के स्थान पर खंडहर थे। उसके लोग, जो बचे थे, उन्हें बेड़ियों में जकड़ कर ले जाया जा रहा था। उसका धन, जो इतने दिनों तक छिपाया गया था, बाबुल के सिपाही ढो रहे थे।
एलियाब और मीका, किसी तरह छिपे रह गए थे, एक टूटी नाली में। जब वे बाहर निकले, तो सूरज ढल रहा था। समुद्र शांत था, लहरें अब भी वैसी ही थीं, जैसे कुछ हुआ ही न हो। पर बंदरगाह के पत्थरों पर अब जहाज़ों के रस्सों के निशान नहीं, बल्कि खून के धब्बे थे।
भविष्यद्वक्ता की वाणी एक बार फिर उसके कान में गूँजी—‘सत्तर वर्ष बीत जाएँगे, टायर के एक राजा के जीवनकाल के बराबर। फिर टायर को उसके वैभव की स्मृति में फिर से वेश्या की तरह गाया जाएगा। वह फिर से अपनी वीणा लेगी, और गा-गाकर अपनी याद दिलाएगी।’
एलियाब ने मीका का हाथ थामा। उसकी आँखें अब समुद्र के रास्ते को नहीं, बल्कि रेगिस्तान की ओर देख रही थीं। “चलो, बेटा,” उसने कहा, आवाज़ एक फुसफुसाहट से ज़्यादा नहीं थी। “यह शहर अब मर चुका है। पर हम जीवित हैं। और शायद… सत्तर वर्ष बाद… शायद तब तक समुद्र फिर से हमें बुलाए।”
वे दोनों उस राख में से निकलकर चल पड़े, पीछे छोड़कर एक सबक—कि समुद्र की गोद में भी, और सोने-चाँदी के ढेर के ऊपर भी, एक ऐसा सिंहासन है जिसके आगे सभी महल धूल हैं। और वह सिंहासन कभी भी, किसी के भी अहंकार को सहन नहीं करता। टायर का गीत समाप्त हो गया था, पर समुद्र की लहरों का स्वर अमर था, और वह एक नया गीत गाने का इंतज़ार कर रहा था।




